Digital education revolution in UP: ‘निष्ठा’ कार्यक्रम से हाईटेक होंगे शिक्षक…प्री-प्राइमरी से 12वीं तक ऑनलाइन ट्रेनिंग शुरू

Digital education revolution in UP

यूपी में डिजिटल शिक्षा क्रांति

‘निष्ठा’ कार्यक्रम से हाईटेक होंगे शिक्षक, प्री-प्राइमरी से 12वीं तक ऑनलाइन ट्रेनिंग शुरू

उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था तेजी से डिजिटल बदलाव की ओर बढ़ रही है। परिषदीय स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार के बाद अब सरकार शिक्षकों को तकनीक और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से लैस करने पर फोकस कर रही है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने ‘निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम’ का पहला चरण शुरू कर दिया है, जिसके जरिए प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को डिजिटल माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

यह प्रशिक्षण DIKSHA Portal के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षण तकनीक और आधुनिक क्लासरूम मैनेजमेंट के लिए तैयार करना है, ताकि सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता को नई ऊंचाई मिल सके।

शिक्षा सुधार का नया मॉडल

राज्य सरकार का मानना है कि केवल स्कूल भवनों का विकास ही शिक्षा सुधार नहीं कहलाता, बल्कि शिक्षकों की क्षमता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि अब ध्यान “डिजिटल टीचर डेवलपमेंट” पर केंद्रित किया गया है।

सरकार तकनीक आधारित ऐसा प्रशिक्षण मॉडल तैयार कर रही है, जो गांवों और दूरदराज़ क्षेत्रों के शिक्षकों तक भी आसानी से पहुंचे। इससे शिक्षकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आधुनिक शिक्षा पद्धतियों की जानकारी मिलेगी और वे बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ा सकेंगे।

21 मई से शुरू हुआ नामांकन

निष्ठा कार्यक्रम के तहत शिक्षकों का ऑनलाइन नामांकन 21 मई 2026 से शुरू हो चुका है। सरकार ने इसके लिए स्पष्ट समयसीमा तय की है।

सरकार ने सभी बीएसए, बीईओ, डायट प्राचार्य, एसआरजी, एआरपी और डायट मेंटर्स को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शत-प्रतिशत शिक्षकों का पंजीकरण सुनिश्चित करें।

तीन स्तरों पर मिलेगा प्रशिक्षण

शिक्षकों की जरूरत और कक्षाओं के स्तर को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

1. ECCE श्रेणी

इस श्रेणी में प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, भाषा विकास और बुनियादी सीखने की क्षमता पर विशेष फोकस रहेगा।

2. FLN श्रेणी

कक्षा 3 से 5 तक के शिक्षकों के लिए यह मॉड्यूल तैयार किया गया है। इसमें भाषा और गणितीय दक्षता को मजबूत करने वाली आधुनिक शिक्षण तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

3. कक्षा 6 से 12 तक

उच्च कक्षाओं के शिक्षकों के लिए साइबर हाइजीन, ई-वेस्ट के खतरे, डिजिटल सुरक्षा, एक्शन रिसर्च और जल संरक्षण जैसे विषयों पर एडवांस कोर्स शामिल किए गए हैं। “कैच द रेन” जैसे अभियानों को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है।

DIKSHA पोर्टल बना बड़ा माध्यम

DIKSHA Portal अब उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है। इसके जरिए शिक्षक ऑनलाइन कोर्स, वीडियो, अध्ययन सामग्री और प्रशिक्षण मॉड्यूल तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

सरकार का दावा है कि इससे प्रशिक्षण प्रक्रिया पारदर्शी होगी और हर शिक्षक की प्रगति की डिजिटल मॉनिटरिंग भी संभव हो सकेगी। इससे यह भी पता चल सकेगा कि कौन शिक्षक प्रशिक्षण पूरा कर चुका है और किसे अतिरिक्त सहायता की जरूरत है।

स्मार्ट क्लास से डिजिटल टीचर तक

उत्तर प्रदेश में पहले ही स्मार्ट क्लास, मिशन प्रेरणा और निपुण भारत मिशन जैसे कार्यक्रमों के जरिए शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जा चुके हैं। अब सरकार शिक्षकों को तकनीक में दक्ष बनाकर शिक्षा सुधार के अगले चरण में प्रवेश कर रही है। नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल लर्निंग और बच्चों की रचनात्मक क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

बच्चों को मिलेगा सीधा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षक तकनीक और आधुनिक शिक्षण तरीकों में निपुण होंगे, तो इसका सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधरेगा, बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ेगी और रिजल्ट में भी सुधार देखने को मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी अब डिजिटल और आधुनिक शिक्षा का अनुभव मिल सकेगा। इससे सरकारी और निजी स्कूलों के बीच गुणवत्ता का अंतर कम करने में मदद मिल सकती है।

शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव

योगी सरकार की यह पहल केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और परिणाम आधारित मॉडल में बदलने की बड़ी रणनीति मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश के सबसे मजबूत डिजिटल शिक्षा मॉडल वाले राज्यों में शामिल किया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो उत्तर प्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है और लाखों बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा।

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