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कृषि में नई छलांग का दावा, ₹6.95 लाख करोड़ जीडीपी का लक्ष्य…कितनी मजबूत है यूपी की ‘अन्नदाता’ रणनीति?

DigitalDesk by DigitalDesk
March 27, 2026
in उत्तर प्रदेश, मुख्य समाचार, राजनीति, लखनऊ
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कृषि में नई छलांग का दावा, ₹6.95 लाख करोड़ जीडीपी का लक्ष्य—कितनी मजबूत है यूपी की ‘अन्नदाता’ रणनीति?

उत्तर प्रदेश में कृषि एक बार फिर विकास के केंद्र में है। नव निर्माण के 9 वर्षों का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में बड़े बदलावों का दावा किया है। लक्ष्य है—कृषि जीडीपी को ₹6.95 लाख करोड़ तक पहुंचाना और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार इस बदलाव को “अन्नदाता केंद्रित विकास मॉडल” के रूप में पेश कर रही है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह बदलाव जमीन पर हर किसान तक पहुंच पाया है?

आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर प्रभावशाली नजर आती है। राज्य का कृषि जीडीपी ₹2.96 लाख करोड़ से बढ़कर ₹6.95 लाख करोड़ तक पहुंचने का दावा किया गया है। देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश का योगदान 21 प्रतिशत तक बताया जा रहा है, जबकि उत्पादन में 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यही वजह है कि आज यूपी को देश के “फूड बास्केट” के रूप में देखा जाने लगा है।

हालांकि, इस बदलाव को केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा गया है। सरकार का दावा है कि कृषि को अब एक समग्र आर्थिक गतिविधि के रूप में विकसित किया जा रहा है—जहां “बीज से बाजार” तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है। इसका मतलब है कि किसान केवल फसल उगाने तक सीमित न रहकर बाजार, मूल्य और प्रोसेसिंग से भी जुड़ सके।

किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के मोर्चे पर भी सरकार ने कई बड़े कदम गिनाए हैं। करीब 86 लाख किसानों की ऋण माफी को एक बड़ी राहत के तौर पर पेश किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 3.12 करोड़ किसानों को ₹99 हजार करोड़ से अधिक की सहायता सीधे खातों में दी गई है। इसके साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा योजनाओं ने जोखिम को कम करने में भूमिका निभाई है।

गन्ना क्षेत्र में सुधार को भी सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि मानती है। पहले जहां भुगतान में देरी एक स्थायी समस्या थी, वहीं अब ₹3.12 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है। इसके साथ ही एथेनॉल उत्पादन में उत्तर प्रदेश का अग्रणी बनना यह दर्शाता है कि कृषि को उद्योग से जोड़ने की दिशा में भी काम हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि गन्ने पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में जोखिम पैदा कर सकती है, इसलिए फसल विविधीकरण पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।

सिंचाई के क्षेत्र में हुए विस्तार को इस परिवर्तन की रीढ़ माना जा रहा है। सिंचाई क्षमता 82 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 105 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है। 1300 से अधिक परियोजनाओं का पूरा होना और सोलर पंपों की स्थापना यह संकेत देती है कि जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई है। बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में इसका असर विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।

तकनीकी मोर्चे पर भी बदलाव की बात की जा रही है। ड्रोन तकनीक, ई-मंडी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने का प्रयास हुआ है। 15 लाख से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिए जाने का दावा है, जिससे खेती की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, यह भी एक बड़ा सवाल है कि क्या छोटे और सीमांत किसानों तक ये तकनीकें समान रूप से पहुंच पा रही हैं या नहीं।

इसके अलावा पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और उद्यानिकी के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विविधीकरण का संकेत है, जो किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

लेकिन इन सभी उपलब्धियों के बीच एक अहम सवाल बना हुआ है—क्या यह विकास हर किसान तक समान रूप से पहुंच पाया है? छोटे और सीमांत किसानों की आय, लागत और बाजार तक पहुंच अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। कुल मिलाकर, नव निर्माण के 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश की कृषि यात्रा ने एक मजबूत आधार जरूर तैयार किया है। उत्पादन बढ़ा है, योजनाएं विस्तारित हुई हैं और तकनीकी हस्तक्षेप भी बढ़ा है। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है—जब इस आधार को स्थायी समृद्धि में बदलना होगा। क्योंकि किसी भी कृषि नीति की सफलता आंकड़ों से नहीं, बल्कि खेत में खड़े किसान की मुस्कान से मापी जाती है।

Tags: #Annadata Centric Development Model#UP Dairy Products#UP GDP#UP Horticulture#Uttar Pradesh 6.95 lakh crore agriculture GDP#Uttar Pradesh agriculture targets
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