अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सीजफायर खत्म होने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नए हवाई हमलों का दौर शुरू किया है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक इन कार्रवाइयों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि पिछले दो दिनों में अमेरिकी हवाई हमलों के कारण कम से कम 14 लोगों की जान गई और 78 लोग घायल हुए हैं। वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर, बहरीन और कुवैत में हमले किए। लगातार बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
ट्रंप के सीजफायर खत्म होने के बयान के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ तेज किया सैन्य अभियान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर समाप्त होने संबंधी बयान के बाद हालात तेजी से बदल गए। अमेरिकी सेना ने ईरान में कई स्थानों पर हवाई कार्रवाई की। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पिछले 48 घंटों में हुए हमलों में 14 लोग मारे गए और 78 अन्य घायल हुए हैं। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि उसकी कार्रवाई ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए की जा रही है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों और नागरिक नाविकों को खतरा पैदा हो सकता है।
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने कतर, बहरीन और कुवैत को बनाया निशाना, क्षेत्र में फिर बढ़ा टकराव
ईरान ने अपने क्षेत्र में हुए अमेरिकी हवाई हमलों के बाद बुधवार को जवाबी कार्रवाई की। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की ओर से कतर, बहरीन और कुवैत में हमले किए गए। इसके कुछ घंटों बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान का नया दौर शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम ने पूरे पश्चिम एशिया में बड़े संघर्ष की आशंका को फिर बढ़ा दिया है। इससे पहले ओमान के तट के पास कई व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों और बंदरगाह सुविधाओं को निशाना बनाया था।
ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों पर अमेरिका का बड़ा हमला, मिसाइल और ड्रोन सुविधाएं भी बनीं निशाना
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने दावा किया है कि ताजा कार्रवाई में ईरान के लगभग 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल स्टोरेज सेंटर, ड्रोन भंडारण सुविधाएं और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य संपत्तियां शामिल बताई गई हैं। United States Central Command के बयान के अनुसार 8 जुलाई को ईरान के खिलाफ हमलों का एक और चरण पूरा किया गया। अमेरिका का कहना है कि इन कार्रवाइयों के जरिए होर्मुज में कमर्शियल शिपिंग पर हमले की ईरानी क्षमता को कम करने की कोशिश की जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा बनी अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता, व्यापारिक जहाजों पर हमलों से बढ़ा तनाव
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह की सैन्य रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। अमेरिकी सेना ने अपनी ताजा कार्रवाई को इसी समुद्री रास्ते की सुरक्षा से जोड़ा है। लगातार हमलों के कारण होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से दोबारा खोलने को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। संघर्ष लंबा खिंचने की स्थिति में समुद्री व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई पर बड़ा दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष बढ़ते ही कच्चे तेल में उछाल, ब्रेंट क्रूड 78.8 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा
सैन्य तनाव का असर गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दिया। 0054 GMT तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 78 सेंट यानी करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 78.8 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड फ्यूचर्स 74 सेंट या 1.01 प्रतिशत की तेजी के साथ 74.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। बुधवार को अमेरिका के नए हमलों की खबर के बाद दोनों प्रमुख तेल बेंचमार्क में एक डॉलर से ज्यादा की तेजी आई थी। अब बाजार की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिका-ईरान के अगले कदम पर टिकी है। संघर्ष और बढ़ा तो कच्चे तेल की कीमतों में नया उछाल देखने को मिल सकता है





