उत्तर प्रदेश की Government of Uttar Pradesh ने राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद अब कर्मचारियों का डीए 58 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया है। सरकार के इस फैसले का फायदा करीब 16 लाख कर्मचारियों, शिक्षकों और रिटायर्ड पेंशनभोगियों को मिलेगा। बढ़ा हुआ भत्ता जून में मिलने वाली सैलरी और पेंशन में दिखाई देगा।
जनवरी 2026 से लागू मानी जाएगी नई DA बढ़ोतरी और मिलेगा एरियर का फायदा
राज्य सरकार ने साफ किया है कि नया महंगाई भत्ता 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों को सिर्फ आगे बढ़ी हुई सैलरी ही नहीं मिलेगी, बल्कि पिछले चार महीनों का एरियर भी दिया जाएगा। जनवरी से अप्रैल 2026 तक का बकाया पैसा कर्मचारियों के GPF खाते में जमा किया जाएगा। वहीं मई 2026 से बढ़े हुए 60 फीसदी डीए का नकद भुगतान सीधे वेतन में जोड़ा जाएगा।
जून में आने वाली सैलरी पहले से ज्यादा होगी और कर्मचारियों को राहत मिलेगी
सरकार की तैयारी है कि मई महीने का वेतन बढ़े हुए डीए के साथ जारी किया जाए। चूंकि मई की सैलरी जून की शुरुआत में कर्मचारियों के खातों में आती है, इसलिए अगले महीने से ही कर्मचारियों को ज्यादा वेतन मिलने लगेगा। बढ़ती महंगाई के बीच यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
पेंशनर्स की मासिक आय में भी बढ़ोतरी होगी और नकद लाभ मिलेगा
इस फैसले का फायदा सिर्फ कार्यरत कर्मचारियों को ही नहीं बल्कि पेंशनभोगियों को भी मिलेगा। सरकार ने तय किया है कि बढ़े हुए महंगाई राहत का भुगतान सीधे पेंशन में जोड़ा जाएगा। इससे रिटायर्ड कर्मचारियों की मासिक आय में भी बढ़ोतरी होगी और महंगाई के असर से कुछ राहत मिल सकेगी।
केंद्र सरकार के फैसले के बाद यूपी सरकार ने तेजी से लिया बड़ा निर्णय
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 22 अप्रैल 2026 को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डीए में 2 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भी राज्य कर्मचारियों को समान लाभ देने की प्रक्रिया तेज कर दी। माना जा रहा है कि अन्य राज्य सरकारें भी जल्द इसी तरह के फैसले ले सकती हैं।
बेसिक सैलरी के हिसाब से तय होगा फायदा और बढ़ेगी मासिक कमाई
महंगाई भत्ते में यह इजाफा कर्मचारियों की बेसिक सैलरी के अनुसार जोड़ा जाएगा। जिन कर्मचारियों का मूल वेतन ज्यादा है, उन्हें हर महीने ज्यादा फायदा मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और घरेलू खर्चों का दबाव कुछ कम होगा।





