UP News: यूपी में फाइनल वोटर लिस्ट जारी…84 लाख नए नाम जुड़े 166 दिन के अभियान के बाद बदली ये तस्वीर

उत्तर प्रदेश की राजनीति और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है, जिसमें रिकॉर्ड स्तर पर नए मतदाताओं की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) अभियान के तहत 166 दिनों तक चले व्यापक सत्यापन और पंजीकरण अभियान के बाद यह सूची प्रकाशित की गई है। इस प्रक्रिया के बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 हो गई है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

ड्राफ्ट से फाइनल तक 84 लाख का उछाल

6 जनवरी 2026 को जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में जहां कुल 12 करोड़ 55 लाख मतदाता दर्ज थे, वहीं अंतिम सूची में यह संख्या 84 लाख 28 हजार 767 बढ़कर नए शिखर पर पहुंच गई है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य में मतदाता जागरूकता अभियान ने जमीनी स्तर पर प्रभाव डाला है। बड़ी संख्या में युवाओं और नए पात्र नागरिकों ने इस बार अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराया।

पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर का संतुलन

नई सूची में मतदाताओं के वर्गीकरण पर नजर डालें तो पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 करोड़ 30 लाख 71 हजार 61 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6 करोड़ 9 लाख 9 हजार 525 दर्ज की गई है। इसके अलावा थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 4,206 है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि चुनाव आयोग सभी वर्गों को समान रूप से शामिल करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है।

इन जिलों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

राज्य के कई जिलों में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। खासकर बड़े और तेजी से विकसित हो रहे जिलों में नए मतदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है।

प्रयागराज: 3,29,421
लखनऊ: 2,85,961
बरेली: 2,57,920
गाजियाबाद: 2,43,666
जौनपुर: 2,37,590

इन जिलों में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि और जागरूकता अभियान का असर सीधे मतदाता सूची पर पड़ा है।

विधानसभा क्षेत्रों में भी रिकॉर्ड इजाफा

केवल जिलों ही नहीं, बल्कि विधानसभा क्षेत्रों में भी नए मतदाताओं की बड़ी संख्या जुड़ी है। कुछ क्षेत्रों में यह वृद्धि चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है।

साहिबाबाद (55): 82,898
जौनपुर (366): 56,118
लखनऊ पश्चिम (171): 54,822
लोनी (53): 53,679
फिरोजाबाद (97): 47,757

इन आंकड़ों से साफ है कि आने वाले चुनावों में इन सीटों पर मुकाबला और अधिक दिलचस्प होने वाला है।

दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया ने बढ़ाई पारदर्शिता

ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद नागरिकों को दो महीने तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया गया। इस दौरान प्राप्त आवेदनों का विधिवत परीक्षण किया गया और उसके बाद अंतिम सूची तैयार की गई। इस प्रक्रिया ने न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित की, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि कोई पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे।

नाम छूटे तो अब भी मौका

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाया है, तो वह फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकता है। इसके अलावा, यदि किसी को सूची में शामिल नामों पर आपत्ति है, तो वह 10 अप्रैल से 15 दिनों के भीतर संबंधित जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अपील दर्ज कर सकता है।

डिजिटल जांच और जागरूकता पर जोर

निर्वाचन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे आधिकारिक वेबसाइट या अपने नजदीकी निर्वाचन कार्यालय में जाकर अपने नाम की पुष्टि अवश्य कर लें। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नाम जांचने की सुविधा ने इस प्रक्रिया को और आसान बना दिया है।

लोकतंत्र की मजबूती की ओर बड़ा कदम

विशेषज्ञों के अनुसार, मतदाता सूची में इतनी बड़ी वृद्धि लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है। इससे यह स्पष्ट होता है कि लोग अब अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाना चाहते हैं। यह न केवल चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाएगा, बल्कि सरकार की जवाबदेही भी बढ़ाएगा।

 

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