यूपी चुनाव 2027: हाजी शौकत अली के बयान पर जानें क्यों मचा सियासी घमासान…किसका होगा एनकाउंटर..?

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यूपी चुनाव 2027: हाजी शौकत अली के बयान पर जानें क्यों मचा सियासी घमासान…किसका होगा एनकाउंटर

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही सियासी सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। चुनावी माहौल में जहां राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडे और रणनीति को धार देने में जुटे हैं, वहीं नेताओं की बयानबाज़ी भी लगातार तीखी होती जा रही है। इसी कड़ी में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हाजी शौकत अली के एक विवादित बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उनके बयान को लेकर अब सियासी पारा चढ़ गया है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

दरअसल, मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हाजी शौकत अली ने मंच से ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। उन्होंने कहा कि “हमें 111 नहीं, सिर्फ 11 विधायक दे दो, हम अपनी ताकत दिखा देंगे।” इसके साथ ही उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि “मुसलमानों का एनकाउंटर करने वालों का भी एनकाउंटर होगा।” इतना ही नहीं, मस्जिदों और मदरसों की सुरक्षा को लेकर उन्होंने “एक डंडा, एक झंडा और एक नेता” बनाने की बात कही। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

इस बयान को विपक्षी दलों ने भड़काऊ और समाज को बांटने वाला करार दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद प्रमोद तिवारी ने AIMIM पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति देश और समाज के लिए खतरनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी की पार्टी चुनावों में सिर्फ वोट काटने का काम करती है और अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को फायदा पहुंचाती है। प्रमोद तिवारी ने यहां तक कहा कि AIMIM भाजपा की “बिछड़ी हुई जुड़वा” की तरह काम करती है, जो चुनाव के समय सक्रिय होकर विपक्षी वोटों में सेंध लगाती है।

वहीं समाजवादी पार्टी ने भी इस बयान से दूरी बनाते हुए इसे गंभीरता से लेने से इनकार किया है। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि प्रदेश की जनता 2027 में बदलाव के लिए तैयार है और अखिलेश यादव के नेतृत्व में एक मजबूत सरकार बनाने का मन बना चुकी है। उन्होंने हाजी शौकत अली के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे बयानों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है और जनता विकास के मुद्दों पर फैसला करेगी।

इधर, सत्ता पक्ष की ओर से भी इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सख्त लहजे में कहा कि देश कानून से चलता है, किसी व्यक्ति या संगठन के बयान से नहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। गिरिराज सिंह ने यह भी कहा कि इस तरह की भाषा न सिर्फ असंवैधानिक है बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी मौसम में इस तरह के बयान अक्सर सुर्खियां बटोरने और खास वर्ग को साधने के लिए दिए जाते हैं। हालांकि, ऐसे बयान कई बार उल्टा असर भी डालते हैं और व्यापक स्तर पर आलोचना का कारण बनते हैं। हाजी शौकत अली के बयान के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहां एक तरफ उनके समर्थक इसे अधिकारों की आवाज बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विरोधी इसे भड़काऊ और गैर-जिम्मेदाराना करार दे रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में AIMIM की भूमिका को लेकर भी लंबे समय से बहस होती रही है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन विपक्षी दल अक्सर उस पर वोटों के ध्रुवीकरण का आरोप लगाते हैं। ऐसे में इस तरह के बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं या महज व्यक्तिगत राय, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल, एक बयान ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। चुनाव से पहले इस तरह की बयानबाज़ी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। अब देखना होगा कि इस विवाद का चुनावी समीकरणों पर कितना असर पड़ता है और क्या यह मुद्दा आगे भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहता है। इतना तय है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी संग्राम अब सिर्फ मुद्दों का नहीं, बल्कि बयानबाज़ी का भी होता जा रहा है।

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