उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक चर्चा फिर तेज हो गई है। इसकी एक वजह यह भी है कि 2026 का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ था, लेकिन 29 सितंबर तक उसके सत्रावसान की अधिसूचना सामने नहीं आई है। लोकसभा की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ‘Adjournment Sine Die’ का मतलब बैठक को बिना अगली तारीख तय किए रोकना है, जबकि सत्रावसान राष्ट्रपति के आदेश से होता है। ऐसे में मौजूदा सत्र को लेकर संवैधानिक स्थिति पर चर्चा बनी हुई है।
सत्र अभी खत्म क्यों नहीं हुआ?
मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चला और इस दौरान 19 बैठकें हुईं। इसके बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। संसद की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, स्थगन और सत्रावसान अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए केवल सत्र के स्थगित होने का मतलब यह नहीं है कि संसद का सत्र औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। 28 सितंबर की रिपोर्टों में भी बताया गया कि मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान अभी नहीं हुआ था।
क्या 1-2 दिन में बुल सकता है सदन?
संवैधानिक व्यवस्था के तहत संसद के दोनों सदनों को बुलाने की शक्ति राष्ट्रपति के पास है, जो मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करते हैं। इसलिए किसी सत्र को दोबारा बैठक के लिए बुलाना संभव है, लेकिन 24 या 48 घंटे में ऐसा करना कोई तय संवैधानिक समय-सीमा नहीं है। यह कहना भी सही नहीं होगा कि सरकार केवल इसलिए किसी बिल को तुरंत पास करा सकती है क्योंकि सत्र का सत्रावसान नहीं हुआ है। बिल के लिए सदन की कार्यवाही, नोटिस, चर्चा और मतदान जैसी संसदीय प्रक्रियाएं जरूरी रहेंगी।
परिसीमन बिल की असली स्थिति क्या है?
यहां एक अहम तथ्य सामने आता है। परिसीमन से जुड़े विधेयक पहली बार अप्रैल 2026 में ही संसद में लाए जा चुके थे। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक और केंद्रशासित प्रदेशों से जुड़ा विधेयक 16 अप्रैल को लोकसभा में पेश हुए थे। लेकिन संविधान संशोधन विधेयक जरूरी विशेष बहुमत हासिल नहीं कर सका। लोकसभा में इसके पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। इसके बाद संबंधित परिसीमन विधेयक भी आगे नहीं बढ़ सका।
इसलिए यह कहना कि ये विधेयक मानसून सत्र में लंबित रह गए और अब उसी रूप में उन्हें केवल दोबारा बैठक बुलाकर पास किया जा सकता है, सही नहीं होगा। अगर सरकार इसी विषय पर आगे बढ़ती है तो उसे मौजूदा कानूनी स्थिति और संसदीय प्रक्रिया के अनुसार कदम उठाना होगा।
महिला आरक्षण से क्या संबंध है?
2023 के 106वें संविधान संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया था। इसके लागू होने को परिसीमन और जनगणना से जोड़ा गया है। 2026 में पेश संविधान संशोधन विधेयक में परिसीमन के लिए अलग व्यवस्था और महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया में बदलाव का प्रस्ताव था। प्रस्ताव में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान भी शामिल था।
यूपी चुनाव से पहले क्या बदलेगा?
यूपी में चुनाव से पहले इस मुद्दे की राजनीतिक अहमियत जरूर बढ़ गई है, लेकिन अभी उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार निश्चित रूप से चुनाव से पहले नया परिसीमन कानून पास कराने जा रही है। इसके लिए नया विधायी कदम, संसद में पर्याप्त समर्थन और संविधान संशोधन से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसलिए फिलहाल चर्चा तेज है, लेकिन सरकार की ओर से ऐसा कोई अंतिम आधिकारिक ऐलान सामने नहीं आया है कि यूपी चुनाव से पहले परिसीमन विधेयक जरूर पारित किया जाएगा





