देशभर में बेमौसम बारिश, —बेमौसम बारिश से खेतों में तबाही…मुआवजे की आस में किसान परेशान
नई दिल्ली। देशभर में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। गेहूं, चना, सरसों के साथ-साथ आम और लीची जैसी बागवानी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। हालात ऐसे हैं कि खेतों में खड़ी फसलें गिर गई हैं और कटी हुई उपज भी भीगकर खराब होने लगी है।
मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा असर
मध्य प्रदेश में 42 जिलों में बारिश दर्ज की गई
मध्य प्रदेश में 13 जिलों में ओलावृष्टि हुई
मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। यहां 42 जिलों में बारिश दर्ज की गई, जबकि 13 जिलों में ओलावृष्टि हुई। आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, झाबुआ, खंडवा, आगर-मालवा, विदिशा, छिंदवाड़ा, जबलपुर, दमोह, सिवनी और छतरपुर जैसे इलाकों में ओले गिरने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस समय अधिकांश जगहों पर गेहूं और चना की फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन तेज हवाओं और ओलों ने फसलों को खेतों में ही बिछा दिया। कई जगहों पर कटी हुई फसल खुले में पड़ी थी, जो बारिश में भीगकर खराब होने लगी है।
मौसम विभाग के अनुसार, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन की सक्रियता के चलते यह स्थिति बनी है। प्रदेश के कई हिस्सों में 30 से अधिक जिलों में अगले कुछ दिनों तक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि अभी खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
उत्तर प्रदेश में भी बेमौसम बारिश ने किसानों को झटका दिया
उत्तर प्रदेश में भी बेमौसम बारिश ने किसानों को झटका दिया है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को तुरंत फसल नुकसान का आकलन करने और प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारियों को मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेने और रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है, ताकि मुआवजा वितरण में देरी न हो।
बिहार में आम और लीची की फसल को नुकसान पहुंचा
बिहार में भी मौसम का असर साफ दिखाई दिया है। मुजफ्फरपुर समेत कई इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि से आम और लीची की फसल को नुकसान पहुंचा है। इस समय पेड़ों पर आए फल मौसम की मार से झड़ने लगे हैं, जिससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। वहीं जम्मू क्षेत्र के सांबा इलाके में भी बारिश के कारण गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है।
महाराष्ट्र में मौसम बारिश ने कहर बरपाया
चार दिनों में 533 गांव प्रभावित
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में भी बेमौसम बारिश ने कहर बरपाया है। पिछले चार दिनों में 533 गांव प्रभावित हुए हैं और 20 हजार से अधिक किसान नुकसान झेल रहे हैं। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 11 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फसलें खराब हुई हैं। नांदेड़ और हिंगोली में बिजली गिरने से दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है, लेकिन आशंका है कि अंतिम आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हो सकते हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय रबी फसलें पककर तैयार थीं, ऐसे में बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ा है। गेहूं और चना की फसलें झुकने या गिरने से उत्पादन घट सकता है, जबकि भीगने से दाने की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है। इससे किसानों को बाजार में उचित कीमत नहीं मिल पाएगी।
मौसम की इस मार से किसान बेहद परेशान हैं और सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने पूरे साल मेहनत की, लेकिन कटाई के ठीक पहले इस तरह की आपदा ने उन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया है। यदि समय पर राहत नहीं मिली, तो उनके लिए अगली फसल की तैयारी करना भी मुश्किल हो जाएगा।
सरकार और प्रशासन ने राहत कार्यों की बात कही है, लेकिन किसानों की नजर अब मुआवजे के ऐलान और उसके त्वरित वितरण पर टिकी है। कई राज्यों में अधिकारियों को सर्वे कर नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। कुल मिलाकर, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने देशभर के किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। जहां एक ओर मौसम की मार ने फसलों को तबाह किया है, वहीं दूसरी ओर किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ने की आशंका है। अब यह देखना होगा कि सरकारें कितनी जल्दी राहत पहुंचाकर किसानों को इस संकट से उबार पाती हैं।





