रावलकोट/इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। स्थानीय संगठनों का दावा है कि बीते 48 घंटों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 31 नागरिकों की मौत हुई है, जिसके बाद जनाक्रोश और तेज हो गया है। प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आंदोलन को निर्णायक चरण में ले जाने का ऐलान किया है। इस बीच पाकिस्तान के सांसद मौलाना अता उर रहमान के बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा हालात नहीं बदले तो पाकिस्तान के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
JAAC का कहना है कि 5 जून से शुरू हुए आंदोलन में अब तक करीब 100 लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं। संगठन का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे लोगों पर सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की, जिसमें आम नागरिकों के साथ एक मस्जिद के इमाम की भी मौत हुई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सरकार के खिलाफ तेज हुआ आंदोलन
PoK में लंबे समय से बिजली, महंगाई, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और राजनीतिक अधिकारों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अब यह आंदोलन कथित तौर पर पाकिस्तान सरकार और सेना की नीतियों के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
JAAC के नेता सरदार अमान खान और अन्य आंदोलनकारियों ने कहा है कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक लोगों को अपने अधिकार नहीं मिल जाते। आंदोलनकारी यह भी आरोप लगा रहे हैं कि क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं और सेना की तैनाती बढ़ा दी गई है।
चुनावों पर भी उठे सवाल
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हालिया चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारी संगठनों का दावा है कि लोगों ने चुनाव का व्यापक बहिष्कार किया, जबकि पाकिस्तान सरकार मतदान प्रतिशत अधिक होने का दावा कर रही है। इन विरोधाभासी दावों के बीच चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मौलाना अता उर रहमान की चेतावनी
पाकिस्तानी सांसद मौलाना अता उर रहमान ने संसद में कहा कि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा समेत विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते असंतोष को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि लोगों की शिकायतों का समाधान नहीं किया गया तो देश के सामने गंभीर राजनीतिक और राष्ट्रीय संकट खड़ा हो सकता है।
उनका बयान ऐसे समय आया है जब बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में भी सुरक्षा और शासन व्यवस्था को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आंदोलन के पीछे बाहरी ताकतों की भूमिका का आरोप लगाया है। हालांकि पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार शहजाद इकबाल ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार आंदोलनकारियों को बाहरी समर्थन प्राप्त मानती थी, तो फिर पिछले डेढ़ वर्ष से उनके साथ बातचीत क्यों करती रही और उनकी अधिकांश मांगें क्यों स्वीकार की गईं।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
JAAC ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार तंत्र से पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग पर चिंता जताते हुए नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
हालात पर बनी हुई है नजर
PoK में जारी विरोध प्रदर्शन, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ते असंतोष तथा पाकिस्तान के भीतर उठ रही राजनीतिक आवाजों ने सरकार के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। हालांकि सरकार की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने देश की आंतरिक राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।





