मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देने के लिए मंदिरों के विकास से जुड़ी एक अनोखी योजना तैयार की जा रही है। पहली बार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए टेंपल बॉन्ड जारी करने की तैयारी है। इसके तहत उज्जैन के काल भैरव, भूखी माता समेत 10 मंदिरों और आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर के विकास तथा सौंदर्यीकरण के लिए धन जुटाया जाएगा। इन बॉन्ड को देश-विदेश के श्रद्धालु और आम निवेशक खरीद सकेंगे। अगले एक-दो महीने में इनकी ऑनलाइन खरीद-बिक्री शुरू होने की संभावना जताई गई है। पूरी परियोजना का अनुमानित आकार 1,124 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन में सांदीपनि लोक और शनि लोक जैसी धार्मिक परियोजनाओं को भी विकसित करने की तैयारी है।
मंदिरों के विकास के लिए पहली बार जारी होंगे टेंपल बॉन्ड, 200 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी
उज्जैन विकास प्राधिकरण की योजना के तहत धार्मिक स्थलों के विकास के लिए करीब 200 करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी किए जाएंगे। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी के अनुसार, पूरी योजना की लागत 1,124 करोड़ रुपये रखी गई है। इसमें यूडीए की गारंटी पर 643 करोड़ रुपये का बैंक ऋण लेने का प्रस्ताव है। इसके अलावा केंद्र सरकार से 25 प्रतिशत यानी 281 करोड़ रुपये मिलने का प्रावधान है। शेष राशि जुटाने के लिए स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। लिस्टिंग से पहले होने वाली बेल सेरेमनी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शामिल होने की संभावना है।
मंदिरों की दुकानों, पार्किंग और प्रवेश शुल्क से होने वाली कमाई से चुकाया जाएगा कर्ज
टेंपल बॉन्ड की खास बात यह है कि मंदिरों से जुड़े व्यावसायिक संसाधनों से होने वाली आमदनी को भुगतान व्यवस्था का आधार बनाने का प्रस्ताव है। मंदिरों के आसपास विकसित होने वाली दुकानों, पार्किंग और प्रवेश शुल्क से मिलने वाला राजस्व बैंक ऋण चुकाने तथा निवेशकों को भुगतान करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मॉडल के जरिए श्रद्धालु भी मंदिरों के विकास में आर्थिक भागीदारी कर सकेंगे। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में दूसरे धार्मिक स्थलों के विकास के लिए भी ऐसी व्यवस्था अपनाई जा सकती है।
सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के मंदिरों में पार्किंग, सुरक्षा और श्रद्धालु सुविधाओं का होगा विस्तार
आगामी सिंहस्थ-2028 में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों में सुविधाएं बढ़ाने की योजना है। इसमें पार्किंग स्थल, पेयजल व्यवस्था, यात्री सुविधा केंद्र, सड़क और दर्शन मार्गों का विकास शामिल है। इसके अलावा बेहतर रोशनी, सुरक्षा व्यवस्था और आवागमन को सुगम बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। उद्देश्य है कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन, ठहरने और यात्रा में कम से कम परेशानी हो।
पांच हेक्टेयर में विकसित होगा सांदीपनि लोक, 139 करोड़ रुपये से बनेगा आधुनिक धार्मिक परिसर
श्रीमहाकाल महालोक के बाद अब भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली माने जाने वाले सांदीपनि आश्रम को भव्य स्वरूप देने की तैयारी है। करीब पांच हेक्टेयर क्षेत्र में सांदीपनि लोक विकसित किया जाएगा, जिस पर लगभग 139 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने यहां बलराम और सुदामा के साथ 16 विद्याओं और 64 कलाओं की शिक्षा प्राप्त की थी। परियोजना में भव्य प्रवेश द्वार, सुविधा केंद्र और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं बनाई जाएंगी। डिजिटल माध्यम से श्रीकृष्ण की जीवनगाथा दिखाने के लिए एआर, वीआर, ऑडियो-विजुअल प्रदर्शनी और बहुभाषी कंटेंट भी तैयार किया जाएगा।
सांदीपनि लोक में 108 फीट की श्रीकृष्ण प्रतिमा और शनि लोक में बनेगा भव्य मंदिर परिसर
सांदीपनि लोक का प्रमुख आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा होगी। इसके डिजाइन को तकनीकी परीक्षण और विंड टनल स्टडी के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा। दूसरी ओर इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर परिसर के लगभग 21,100 वर्गमीटर क्षेत्र में शनि लोक विकसित करने की योजना है। राज्य सरकार ने 7 जनवरी 2026 को इस परियोजना के लिए 140 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। इसमें मंदिर परिसर का विस्तार, घाटों का सौंदर्यीकरण, स्मार्ट लाइटिंग, सीसीटीवी, पैदल मार्ग, कतार प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा। बेसाल्ट और बंसी पहाड़पुर के पत्थरों से मंदिर संरचना तैयार करने के साथ नवग्रहों से जुड़ी कलाकृतियां और धार्मिक मूर्तियां भी स्थापित करने की योजना है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने की थी।
इस तरह उज्जैन में टेंपल बॉन्ड से लेकर सांदीपनि लोक और शनि लोक तक कई परियोजनाओं के जरिए धार्मिक पर्यटन को विस्तार देने की तैयारी है। इन योजनाओं का लक्ष्य सिंहस्थ-2028 से पहले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना और धार्मिक स्थलों को नया स्वरूप देना है।