भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले की सुनवाई मंगलवार को उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब मामले की आरोपी पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट कक्ष में तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे जैसी स्थिति बन गई। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई की नौबत तक आने की चर्चा रही।
इस मामले में सीबीआई ने समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह की रिमांड समाप्त होने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया। हालांकि, एजेंसी ने इस बार दोनों आरोपियों की आगे की रिमांड नहीं मांगी। दूसरी ओर, अदालत में सबसे अधिक ध्यान उस समय आकर्षित हुआ जब पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने अपने वकील के बजाय स्वयं अपना पक्ष रखा और जांच से लेकर मीडिया कवरेज तक कई मुद्दों पर आपत्ति दर्ज कराई।
कोर्ट में खुद बोलीं गिरिबाला सिंह
सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने अदालत के समक्ष कहा कि उनके खिलाफ जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, उससे उन्हें और उनके परिवार को खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने मीडिया कवरेज पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां-जहां सीबीआई उन्हें लेकर जाती है, वहां मीडिया पहले से मौजूद रहती है। उनके अनुसार यह स्थिति निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को प्रभावित कर सकती है। सूत्र बताते हैं कि गिरिबाला ने अदालत से मीडिया ट्रायल पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि मामले की जांच चल रही है और अंतिम निष्कर्ष आने से पहले सार्वजनिक रूप से आरोपियों को दोषी ठहराने जैसी स्थिति नहीं बननी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।
ट्विशा से मारपीट के आरोपों से किया इनकार
सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की ओर से ट्विशा शर्मा के साथ मारपीट, प्रताड़ना और सबूतों से छेड़छाड़ जैसे आरोपों को खारिज किया गया। दोनों का कहना है कि ट्विशा के साथ उनके संबंध सामान्य थे और उन पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई अब आरोपियों के बयानों का उपलब्ध दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों के साथ मिलान कर रही है। जांच एजेंसी ने हाल ही में घटनाक्रम का सीन रिक्रिएशन भी कराया था और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक व अन्य साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच जारी है।
थप्पड़ मारने का आरोप, बढ़ा विवाद
सुनवाई के दौरान माहौल उस समय और गरमा गया जब गिरिबाला सिंह ने अदालत में आरोप लगाया कि ट्विशा शर्मा पक्ष के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने पहले जबलपुर हाई कोर्ट परिसर में उनके बेटे समर्थ सिंह को थप्पड़ मारा था। यह आरोप सामने आते ही कोर्ट रूम में तनाव बढ़ गया। बताया जाता है कि इस आरोप पर ट्विशा पक्ष के वकील ने कड़ी आपत्ति जताई और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बहस इतनी तेज हो गई कि कुछ समय के लिए अदालत का माहौल असामान्य हो गया। हालांकि न्यायालय की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। वकील की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि यदि ऐसा कोई घटनाक्रम हुआ था तो उसकी औपचारिक शिकायत क्यों नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस लंबी चली।
सीबीआई की कार्रवाई पर भी जताई नाराजगी
गिरिबाला सिंह ने सीबीआई की कुछ प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सीन रिक्रिएशन से जुड़े फुटेज मीडिया तक कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है और इसकी जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि जांच से जुड़ी सामग्री सार्वजनिक होने से मामले की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब सीबीआई उन्हें उनके घर लेकर गई तो वाहन को घर से कुछ दूरी पर रोक दिया गया और उन्हें पैदल ले जाया गया। गिरिबाला के अनुसार, वाहन सीधे घर के सामने भी ले जाया जा सकता था और ऐसा न करना अनावश्यक था।
हाई कोर्ट से जमानत निरस्त होने के बाद हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि 27 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच की स्थिति को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद 28 मई को सीबीआई की टीम गिरिबाला सिंह के निवास पर पहुंची थी। कई घंटों की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। वहीं, उनके बेटे समर्थ सिंह को इससे पहले जबलपुर में न्यायालय के समक्ष पेश होने के बाद हिरासत में लिया गया था। अदालत ने समर्थ को पहले सात दिन और बाद में अतिरिक्त पांच दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा था।
जांच के अगले चरण पर नजर
अब जबकि सीबीआई ने दोनों आरोपियों की आगे की रिमांड नहीं मांगी है, मामले की जांच दस्तावेजी साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और फोरेंसिक रिपोर्टों पर केंद्रित होती दिखाई दे रही है। अदालत में हुई तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। ट्विशा शर्मा आत्महत्या प्रकरण में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई, फोरेंसिक रिपोर्ट और अदालत की आगामी सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। फिलहाल यह मामला कानूनी, सामाजिक और सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।