अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार जगत को चौंकाते हुए कृषि और औद्योगिक उपकरणों पर लागू आयात शुल्क में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। ट्रंप प्रशासन ने कुछ चुनिंदा कृषि उत्पादों और औद्योगिक मशीनरी पर लगने वाले टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिका अपनी व्यापारिक रणनीतियों को नए सिरे से आकार देने में जुटा है।
ट्रंप ने घटाया टैरिफ, लेकिन भारत को फिलहाल नहीं दिख रहा सीधा फायदा
अमेरिका ने कृषि और औद्योगिक उपकरणों पर दी बड़ी राहत
ट्रेड एग्रीमेंट वाले देशों को मिलेगा कम टैरिफ का लाभ
घरेलू स्टील-एल्यूमीनियम को बढ़ावा देने के लिए नई योजना शुरू
दिसंबर 2027 तक लागू रहेगी अस्थायी टैरिफ कटौती
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर टिकी हैं भारतीय निर्यातकों की उम्मीदें
नई घोषणा के मुताबिक, बुलडोजर, फोर्कलिफ्ट, हार्वेस्टर, कंबाइन और अन्य कृषि एवं औद्योगिक उपकरणों की एक विस्तृत श्रेणी पर अब कम आयात शुल्क लागू होगा। इससे उन देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जिनके साथ अमेरिका का औपचारिक व्यापार समझौता मौजूद है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस कदम से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और कृषि, निर्माण तथा विनिर्माण क्षेत्र को नई गति मिलेगी।
हालांकि भारत के लिए यह खबर फिलहाल उतनी उत्साहजनक नहीं मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा दी गई यह राहत मुख्य रूप से उन देशों के लिए है जिनके साथ उसका सक्रिय व्यापार समझौता लागू है। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से व्यापक व्यापार समझौते पर चर्चा जारी है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों को इस टैरिफ कटौती का प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना सीमित नजर आ रही है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि भविष्य में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो भारतीय मशीनरी, कृषि उपकरण और औद्योगिक उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में अवसर बढ़ सकते हैं। लेकिन मौजूदा स्थिति में यह राहत मुख्य रूप से उन देशों के लिए फायदेमंद होगी जो पहले से अमेरिकी व्यापारिक ढांचे का हिस्सा हैं।
ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ कटौती के साथ एक नई प्रोत्साहन योजना भी शुरू की है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी स्टील और एल्यूमीनियम उद्योग को मजबूत करना है। इस योजना के तहत विदेशी निर्माता और भी कम यानी 10 प्रतिशत टैरिफ का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा अमेरिका में आयात किए जाने वाले पूंजीगत उपकरणों में वजन के आधार पर कम से कम 85 प्रतिशत स्टील या एल्यूमीनियम अमेरिकी मूल का हो।
विशेषज्ञ इस योजना को ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” आर्थिक नीति का नया संस्करण मान रहे हैं। एक ओर जहां आयात शुल्क में राहत देकर निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू स्टील और एल्यूमीनियम उद्योग को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देने की कोशिश भी की जा रही है। इससे अमेरिकी कंपनियों को स्थानीय स्तर पर उत्पादित कच्चे माल के उपयोग के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
व्हाइट हाउस के अनुसार यह टैरिफ कटौती अस्थायी है और दिसंबर 2027 तक प्रभावी रहेगी। सरकार का तर्क है कि कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों में लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों और उद्योगों पर दबाव पड़ रहा है। कम टैरिफ की वजह से उपकरणों की कीमतों में कमी आएगी और व्यवसायों को नई मशीनरी खरीदने में आसानी होगी।
कृषि क्षेत्र के लिए यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका के किसान लंबे समय से आधुनिक मशीनों और उपकरणों की बढ़ती लागत को लेकर चिंता जता रहे थे। कम आयात शुल्क से हार्वेस्टर, ट्रैक्टर से जुड़े उपकरण और अन्य कृषि मशीनें अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में सुधार की उम्मीद है।
औद्योगिक क्षेत्र में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। निर्माण, आवास और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कम लागत पर मशीनरी उपलब्ध होगी, जिससे नई परियोजनाओं और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह नीति अमेरिकी अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को मजबूत करने में मदद करेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि टैरिफ नीति में बार-बार बदलाव से वैश्विक व्यापारिक वातावरण में अनिश्चितता बनी रहती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक साझेदारों के साथ स्थायी और स्पष्ट समझौते ही दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकते हैं।
फिलहाल ट्रंप के इस फैसले को अमेरिकी उद्योग और कृषि क्षेत्र के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं भारत समेत कई देश अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों की दिशा में होने वाली भविष्य की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियों के लिए भी अमेरिकी बाजार के नए दरवाजे खुल सकते हैं।





