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deepawali 2026 : धनतेरस पर धनिया खरीदने की परंपरा, आखिर क्यों दिवाली तक संभालकर रखते हैं बीज?

DigitalDesk by DigitalDesk
November 3, 2026
in धर्म, स्पेशल
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tradition of buying coriander seeds on Dhanteras why are these seeds kept safe until Diwali
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धनतेरस का पर्व आते ही सोने-चांदी, बर्तन और नई वस्तुओं की खरीदारी की चर्चा शुरू हो जाती है। लेकिन इस त्योहार से जुड़ी एक ऐसी परंपरा भी है, जो देखने में भले ही छोटी लगे, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से खास मानी जाती है। यह परंपरा है साबुत धनिया खरीदने की। कई घरों में धनतेरस पर खरीदे गए धनिये को दिवाली तक संभालकर रखा जाता है और फिर लक्ष्मी पूजन के बाद इसे तिजोरी में रखने या मिट्टी में बोने की रस्म निभाई जाती है।

आखिर धनिया और धनतेरस का क्या संबंध है? दरअसल, लोक मान्यताओं में धनिया को धन-धान्य, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। धनिया शब्द का संबंध भी ‘धन’ से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि धनतेरस के दिन इसे घर लाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में बरकत बनी रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

धनतेरस की पूजा में भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की आराधना की जाती है। कई परिवारों में साबुत धनिया भी पूजा सामग्री में शामिल किया जाता है। इसे देवी-देवताओं को अर्पित कर सुख-समृद्धि और धन-धान्य की कामना की जाती है। कुछ क्षेत्रों में गुड़ और साबुत धनिया मिलाकर प्रसाद बनाने की परंपरा भी है। गुड़ की मिठास और धनिये को समृद्धि का प्रतीक मानते हुए इसे परिवार में बांटा जाता है।

धनिये के बीज का मिट्टी में बोने पर पौधे के रूप में विकसित होना भी इस परंपरा को खास अर्थ देता है। एक छोटा-सा बीज जब हरे-भरे पौधे में बदलता है, तो इसे विकास, नई शुरुआत और निरंतर उन्नति का प्रतीक माना जाता है। इसी भाव के साथ कुछ परिवार धनतेरस पर खरीदे गए धनिये के बीज दिवाली के बाद गमले या घर की मिट्टी में बोते हैं।

धनिया संभालकर रखने की परंपरा

धनतेरस पर खरीदे गए साबुत धनिये में से कुछ दाने पूजा के लिए अलग रखे जाते हैं। लक्ष्मी पूजन के बाद इन्हें लाल कपड़े में बांधकर या साफ डिब्बी में रखकर तिजोरी अथवा धन रखने के स्थान पर रखने की परंपरा है। कई परिवार इसे दिवाली की रात करते हैं। वहीं कुछ लोग शेष बीजों को गोवर्धन पूजा के बाद मिट्टी में बो देते हैं।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि धनिया रखने या बोने से धन बढ़ने, कर्ज खत्म होने अथवा आर्थिक परेशानी दूर होने की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है। यह आस्था, लोकविश्वास और पारिवारिक परंपरा से जुड़ी रस्म है। पूजा के लिए अलग रखे गए धनिये के अलावा बाकी बीजों का रसोई में मसाले के रूप में इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

इस तरह धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदने की परंपरा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि समृद्धि की कामना, प्रकृति से जुड़ाव और नई शुरुआत का प्रतीक भी है। एक छोटा-सा बीज परिवार को यह संदेश देता है कि जैसे मिट्टी में बोया गया बीज समय के साथ पौधा बनता है, वैसे ही मेहनत, धैर्य और सही प्रयास से जीवन में खुशहाली और तरक्की के रास्ते खुलते हैं।

Tags: #Dhanteras Coriander #The tradition of buying coriander seeds on Dhanteras #The seeds are kept safe until Diwalitradition of buying coriander seeds on Dhanteras why are these seeds kept safe until Diwali
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