टीपू सुल्तान कर्नाटका के सबसे मशहूर राजाओं में गिने जाते है. उन्हें टाइगर ऑफ मैसूर भी कहा जाता है. हाल ही में उनकी एक तलवार ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है. जी हां लंदन में हुई एक नीलामी में टीपू सुल्तान की तलवार बैडबेंचर रिकॉर्ड 14 मिलियन पाउंड (करीब 140 करोड़ रुपए) में बिकी है. टीपू सुल्तान की इस तलवार ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए है और सबसे महंगी बिकने वाली भारतीय वस्तु बन गई है.
तलवार के इतिहास की बात करें तो इसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने 4 मई 1799 में टीपू सुल्तान की हार के बाद सेरिंगापाटम से उनके कई हथियारों के साथ लूटा था. इनमें ये तलवार भी शामिल थी. तलवार टीपू के निजी कमरे से बरामद की गई थी. 1775 से 1779 के बीच टीपू ने मराठा शसकों के खिलाफ लड़ाईयां लड़ी थी , उन्हीं युध्दों के दौरान यह तलवार प्रसिध्द हुई थी.
माना जाता है कि यह तलवार टीपू के शस्त्रागार का सबसे मूल्यवान हथियार था. इस मूल्यवान तलवार पर सोने की लिखावट भी है. आपको बता दें कि मुगल शासकों ने तलवार को जर्मन ब्लेड से तैयार किया गया था, जिसे 16वीं शताब्दी में भारत लाया गया था.
तलवार को बोन्हाम्स ऑक्शन हाउस ने बेचा है. बोन्हाम्स में इस्लामिक और भारतीय कला के समूह प्रमुख, नीमा साघार्ची ने बताया कि “तलवार आसाधारण इतिहास, बेहतरीन कारीगरी, और बेजोड़ शिल्प कला के कौशल का बेहतरीन उदाहरण है”. ऑक्शन हाउस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार नीलामी के दौरान दो बोली लगाने वाले व्यक्तियों के बीच बड़ी गर्मजोशी से मुकाबला हुआ जिसके परिणाम से हम खुश हैं.
नीलामी शुरू होने से पहले बोनहम्स के सीईओ ब्रूनो विंसीगुएरा बताते है कि , यह सबसे आश्चर्यजनक वस्तुओं में से एक है जिसे बोनहम्स को नीलामी में लाने का सौभाग्य मिला है. एक शानदार वस्तु के लिए एक शानदार कीमत है. मैं अपनी टीमों की तारीफ करना चाहूंगा जिन्होंने इस परिणाम को देने के लिए इतनी मेहनत की.
टीपू सुल्तान ने 18वीं शताब्दी के अंत के युद्धों में ख्याति प्राप्त की थी. उन्हें”मैसूर का टाइगर” का उपनाम दिया गया था, इस तलवार से उन्होंने 1779 से पहले तक मराठा शासकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और मैसूर का बचाव किया था. कहा जाता है कि टीपू ने मैसूर की सेना को युध्द कौशल में भारत की सबसे सर्वश्रेष्ठ बना दिया था, उन्होंने युद्धों में रॉकेट आर्टिलरी के इस्तेमाल का बीड़ा उठाया और मैसूर को भारत में सबसे अर्थव्यवस्था में बदल दिया. ऑक्शन हाउस के अनुसार टीपू सुल्तान की मौत के बाद उनकी तलवार ब्रिटिश मेजर जनरल डेविड बेयर्ड को उनके साहस के प्रतीक के रूप में भेंट की गई थी. हालांकि इस बारे में कोई प्रमाण नहीं है.





