पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नाम तेजी से चर्चा में है — बीजेपी विधायक कौस्तव बागची। वजह सिर्फ उनकी चुनावी जीत नहीं, बल्कि वह राजनीतिक प्रण भी है जिसे उन्होंने करीब तीन साल तक निभाया। अब चुनाव जीतने के बाद उन्होंने अपना वह संकल्प खत्म कर दिया है और कहा है — “अब मैं फिर से अपने बाल बढ़ा सकता हूं।”
- तीन साल तक नहीं बढ़ाए बाल
- ममता सरकार के विरोध में लिया था प्रण
- चुनाव जीतते ही बदला कौस्तव का लुक
- बंगाल की राजनीति में चर्चा का नया चेहरा
- ‘अब मैं फिर से बाल बढ़ा सकता हूं’
BJP विधायक कौस्तव बागची ‘गंजा राजनीति’
35 वर्षीय कौस्तव बागची ने उत्तर 24 परगना जिले की बैरकपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर सबका ध्यान खींचा है। उन्होंने फिल्म निर्देशक और तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार राज चक्रवर्ती को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की। लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक नेता के तौर पर नहीं बनी, बल्कि एक ऐसे राजनेता के रूप में बनी जिसने विरोध जताने के लिए अपना सिर मुंडवाकर रखने का प्रण लिया था।
दरअसल, साल 2023 में कौस्तव बागची को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ “व्यक्तिगत टिप्पणी” करने को लेकर तीखी आलोचना की थी। गिरफ्तारी के बाद जब उन्हें जमानत मिली, तब उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक फैसला लिया।
उन्होंने अपना सिर मुंडवा लिया और प्रण किया कि जब तक पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार सत्ता में रहेगी, तब तक वे बाल नहीं बढ़ाएंगे। उस समय यह कदम एक प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर देखा गया, लेकिन धीरे-धीरे यही उनकी राजनीतिक पहचान बन गया। करीब तीन साल तक कौस्तव बागची पूरी तरह गंजे लुक में नजर आए। चुनावी सभाओं से लेकर राजनीतिक मंचों तक उनका यही रूप चर्चा का विषय बना रहा। कई लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, सोशल मीडिया पर मीम्स और कार्टून बनाए गए, लेकिन कौस्तव ने इसे कभी नकारात्मक रूप में नहीं लिया।
चुनाव जीतने के बाद कौस्तव बागची ने कहा, “अब मैं अपने बाल फिर से बढ़ा सकता हूं। मैंने प्रण लिया था कि जब तक टीएमसी को हराकर बीजेपी सत्ता में नहीं आएगी, तब तक मैं सिर मुंडवाकर रखूंगा। इस दौरान मुझे अपमान, आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने मेरे कार्टून भी बनाए, लेकिन मैं हमेशा उनकी प्रतिभा की तारीफ करता था क्योंकि मैं प्रतिभाशाली लोगों का सम्मान करता हूं।”
उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने भी इस पूरे दौर में उनका साथ दिया। “हमने कभी इन बातों को नकारात्मक तरीके से नहीं लिया। लोग मजाक उड़ाते थे, लेकिन हम जानते थे कि मैं यह सब क्यों कर रहा हूं,” उन्होंने कहा। कौस्तव बागची पहले कांग्रेस में थे, लेकिन साल 2024 में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया। बीजेपी में आने के बाद वे तेजी से उभरे और पार्टी ने उन्हें बैरकपुर सीट से मैदान में उतारा। चुनाव प्रचार के दौरान उनका गंजा लुक लोगों के बीच अलग पहचान बन गया।
अब विधायक बनने के बाद कौस्तव का कहना है कि उनकी प्राथमिकता जनता की सेवा और लोगों की समस्याओं का समाधान करना होगा। उन्होंने कहा, “मैं लोगों की गरिमा और उनके अधिकारों के लिए काम करना चाहता हूं। चुनाव जीतने के बाद अब मेरी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।”
उन्होंने अपनी जीत का श्रेय बैरकपुर की जनता को दिया। कौस्तव ने कहा, “मैं यहां के लोगों के आशीर्वाद और भरोसे की वजह से जीता हूं। जनता ने मुझे अपना बेटा माना और समर्थन दिया।”
कौस्तव पेशे से वकील भी हैं। उन्होंने बताया कि राजनीति में उनकी रुचि बचपन से ही थी। “मैं कक्षा छह से राजनीति में रुचि रखता था। वकालत करने के बावजूद हमेशा लोगों के लिए काम करना चाहता था,” उन्होंने कहा। अपने प्रतिद्वंद्वी राज चक्रवर्ती पर भी उन्होंने तीखा हमला बोला। कौस्तव ने कहा, “आखिरकार यहां की जनता अपने ही बेटे को चुनेगी।” पश्चिम बंगाल की राजनीति में कौस्तव बागची की यह कहानी सिर्फ एक चुनावी जीत की नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतीकवाद और व्यक्तिगत संकल्प की भी मिसाल बन गई है। तीन साल तक गंजा रहने का उनका फैसला अब खत्म हो चुका है, लेकिन इस दौरान बना उनका राजनीतिक संदेश लंबे समय तक चर्चा में रह सकता है।





