ठेकुआ बना भारत की ‘स्वीट डिप्लोमेसी’…पीएम मोदी के तोहफे ने स्लोवाक नेता का जीता दिल…सोशल मीडिया पर की तारीफ

Thekua

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बड़े समझौतों और रणनीतिक बैठकों के साथ-साथ छोटे सांस्कृतिक उपहार भी रिश्तों को नई मजबूती देते हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्लोवाकिया दौरे के दौरान ऐसा ही एक भावनात्मक और सांस्कृतिक पल देखने को मिला। जब उन्होंने स्लोवाक नेशनल काउंसिल के चेयरमैन रिचर्ड राशि को बिहार का प्रसिद्ध पारंपरिक मिष्ठान ठेकुआ भेंट किया। भारतीय संस्कृति से जुड़े इस विशेष उपहार ने स्लोवाक नेता का दिल जीत लिया।

रिचर्ड ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस मुलाकात का वीडियो साझा किया। वीडियो में वह ठेकुआ का डिब्बा खोलते हैं, उसे चखते हैं और मुस्कुराते हुए उसकी तारीफ करते हैं। उन्होंने लिखा कि कूटनीति केवल बड़े समझौतों तक सीमित नहीं होती, बल्कि ऐसे छोटे-छोटे सांस्कृतिक आदान-प्रदान ही देशों और लोगों को करीब लाते हैं।

इस खास मुलाकात में उपहारों का आदान-प्रदान दोनों तरफ से हुआ। जहां प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार का पारंपरिक ठेकुआ भेंट किया, वहीं रिचर्ड राशि ने उन्हें हिंदी में लिखे स्लोवाक स्पा वेफर्स उपहार स्वरूप दिए। यह दृश्य भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रतीक बन गया।

ठेकुआ केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र में इसकी विशेष पहचान है। खासतौर पर छठ महापर्व में इसे प्रसाद के रूप में बनाया और वितरित किया जाता है। घी, गेहूं के आटे और गुड़ या चीनी से तैयार होने वाला यह पारंपरिक मिष्ठान लंबे समय तक सुरक्षित रहता है, इसलिए इसे यात्रा और उपहार के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कूटनीति में अब सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों का उपयोग “सॉफ्ट डिप्लोमेसी” के प्रभावी माध्यम के रूप में लगातार बढ़ रहा है। योग, आयुर्वेद, मिलेट्स और हस्तशिल्प के बाद अब क्षेत्रीय व्यंजन भी भारत की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाई दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत केवल देश की पहचान नहीं, बल्कि दुनिया से रिश्ते मजबूत करने का भी सशक्त माध्यम है। बिहार का ठेकुआ अब सिर्फ छठ पर्व का प्रसाद नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक मिठास का वैश्विक दूत बनकर सामने आया है।

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