अमेरिका की सख्त चेतावनी, ईरान का पलटवार ट्रंप बोले— परमाणु समझौता करो, नहीं तो अगला हमला होगा ‘कहीं ज्यादा खतरनाक’

The US Trump issued a stern warning Iran retaliate

अमेरिका की सख्त चेतावनी, ईरान का पलटवार

ट्रंप बोले— परमाणु समझौता करो, नहीं तो अगला हमला होगा ‘कहीं ज्यादा खतरनाक’

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान जल्द ही नया परमाणु समझौता करने के लिए बातचीत की मेज पर नहीं आया, तो उसे अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, जो जून में हुए हमले से “कहीं ज्यादा भयानक” होगी। ट्रंप की इस चेतावनी के जवाब में ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है और अमेरिका, इजरायल तथा उनके समर्थकों को निशाना बनाने की धमकी दी है। दोनों देशों के बीच बयानबाजी के इस दौर ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंका को और गहरा कर दिया है।

ट्रंप ने क्या कहा?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए ईरान को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने ईरान से कहा कि वह “बातचीत की मेज पर आए” और एक ऐसा “निष्पक्ष और संतुलित” परमाणु समझौता करे, जिसमें यह सुनिश्चित हो कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों। ट्रंप ने अपने संदेश में साफ लिखा, “समय बहुत ही तेजी से खत्म हो रहा है… ट्रंप ने कहा अगला हमला कहीं ज्यादा खतरनाक होगा…ट्रंप ने कहा ऐसा दोबारा होने मत दो… उन्होंने इस चेतावनी को जून महीने में हुए अमेरिकी सैन्य हमले से जोड़ते हुए कहा कि अमेरिका फिर से कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा बेड़ा, जिसकी अगुवाई विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन कर रहा है, ईरान की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह कैरियर स्ट्राइक ग्रुप इस सप्ताह मध्य पूर्व पहुंच चुका है, जिससे क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ गया है।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया

ट्रंप की चेतावनी के तुरंत बाद ईरान के शीर्ष अधिकारियों ने कड़ा पलटवार किया। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली शमखानी ने कहा कि अगर अमेरिका ने कोई भी सैन्य कार्रवाई की, तो ईरान अमेरिका, इजरायल और उनके समर्थकों को निशाना बनाएगा। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह तैयार हैं और “उनकी उंगलियां ट्रिगर पर हैं।” उन्होंने कहा कि किसी भी आक्रामक कदम का जवाब बेहद ताकतवर और तुरंत दिया जाएगा। हालांकि, अराघची ने यह भी जोड़ा कि ईरान अब भी एक “आपसी लाभ, निष्पक्ष और संतुलित” परमाणु समझौते के लिए तैयार है, लेकिन शर्त यह है कि बातचीत बराबरी के स्तर पर हो और उस पर किसी तरह का दबाव, धमकी या डराने की नीति न थोपी जाए।

तनाव बढ़ने की पृष्ठभूमि क्या है?

हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इसकी एक बड़ी वजह ईरान में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हैं, जिन पर ईरानी सरकार ने सख्ती से कार्रवाई की। इन प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों की मौत और गिरफ्तारियां हुईं। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रखता है, तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि बाद में ये प्रदर्शन कुछ हद तक शांत हो गए। इसी बीच अमेरिका ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र से अपने नौसैनिक बलों को मध्य पूर्व की ओर भेजना शुरू किया। जून में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान की परमाणु सुविधाओं पर किए गए संयुक्त हवाई हमलों के बाद ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान ने दोबारा अपना परमाणु कार्यक्रम तेज किया, तो अमेरिका कार्रवाई करेगा।

कूटनीति फिलहाल ठप

तेज बयानबाजी के बावजूद, कूटनीतिक स्तर पर कोई सक्रिय पहल नजर नहीं आ रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि हाल के दिनों में उनकी अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से कोई बातचीत नहीं हुई है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, न तो किसी तरह की सीधी वार्ता हो रही है और न ही तनाव कम करने के लिए कोई तत्काल प्रयास दिखाई दे रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि फिलहाल हालात को शांत करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

अमेरिका ईरान की आंतरिक स्थिति को कैसे देख रहा है?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को एक संसदीय समिति के सामने ईरान की आंतरिक स्थिति पर अपना आकलन पेश किया। उन्होंने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा रही है और मौजूदा शासन “शायद अब तक का सबसे कमजोर दौर” देख रहा है। रुबियो के मुताबिक, राजनीतिक दमन और आर्थिक मुश्किलों की वजह से ईरान में फिर से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भड़क सकते हैं। उन्होंने अनुमान जताया कि हालात शांत होने के बजाय आने वाले समय में और विस्फोटक हो सकते हैं।

प्रश्न: ट्रंप किस तरह की कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं?
उत्तर: राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के खिलाफ एक ऐसे अमेरिकी सैन्य हमले की धमकी दे रहे हैं, जो जून में किए गए परमाणु ठिकानों पर हमले से कहीं ज्यादा गंभीर होगा।

प्रश्न: अगर हमला हुआ तो ईरान क्या करेगा?
उत्तर: ईरान के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि उसकी सेना तुरंत और ताकतवर जवाब देगी और अमेरिका, इजरायल तथा उनके समर्थकों को निशाना बनाएगी।

प्रश्न: क्या अमेरिकी सेना की तैनाती बढ़ रही है?
उत्तर: हां, यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाला कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मध्य पूर्व पहुंच चुका है।

प्रश्न: क्या ईरान परमाणु समझौते के लिए तैयार है?
उत्तर: ईरान का कहना है कि वह निष्पक्ष और संतुलित समझौते के लिए तैयार है, लेकिन धमकी और दबाव में बातचीत नहीं करेगा। कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं दिखता। सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक ठहराव के बीच यह संकट आने वाले दिनों में क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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