देशभर में आज मेडिकल स्टोर बंद रखने को लेकर खुदरा फार्मेसी क्षेत्र में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के सूत्रों के अनुसार कई राज्य स्तरीय फार्मेसी संगठनों ने इस बंद से दूरी बनाते हुए दवा आपूर्ति को सामान्य रखने का निर्णय लिया है।
देशभर में मेडिकल स्टोर्स पर बंद का असर
ई-फार्मेसी विवाद के बीच उठी बड़ी बहस
राष्ट्रव्यापी बंद और अलग-अलग रुख
ई-फार्मेसी को लेकर बढ़ी चिंता
राज्य फार्मेसी संगठन ने बनाई बंद से दूरी
ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने ई-फार्मेसी के संचालन और उससे जुड़े नियमों को लेकर 20 मई को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से पारंपरिक खुदरा व्यापार और नियमों के पालन पर असर पड़ सकता है।
CDSCO और संगठन के बीच बातचीत
सूत्रों के मुताबिक, CDSCO और AIOCD प्रतिनिधियों के बीच हाल ही में बैठक हुई, जिसमें संगठन ने अपनी चिंताएं और मांगें रखीं। नियामक संस्था ने आश्वासन दिया है कि इन मुद्दों की गंभीरता से समीक्षा की जा रही है और आवश्यक नियमों पर विचार किया जाएगा।
मरीजों पर असर की आशंका
CDSCO के अनुसार, दवा दुकानों के संचालन में किसी भी तरह की बाधा सीधे मरीजों को प्रभावित कर सकती है। खासकर वे मरीज जो जीवनरक्षक और जरूरी दवाओं पर निर्भर हैं, उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, दवा आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
कई राज्यों ने बंद से बनाई दूरी
पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, लद्दाख, गुजरात, छत्तीसगढ़, सिक्किम और उत्तराखंड के फार्मेसी संगठनों ने साफ किया है कि वे बंद में शामिल नहीं होंगे और दवा सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।नियामक अधिकारियों ने कहा है कि मरीजों को दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका मानना है कि फार्मेसी क्षेत्र की समस्याओं का समाधान बातचीत और परामर्श के जरिए किया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।
स्वास्थ्य व्यवस्था बनाम डिजिटल बदलाव की बहस
यह पूरा विवाद देश में स्वास्थ्य सेवाओं और ई-फार्मेसी मॉडल के बीच संतुलन की चुनौती को सामने लाता है। फिलहाल सरकार और संगठन दोनों ही संवाद के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं।





