थरूर बनाम कांग्रेस: क्या रिश्ता टूटने की कगार पर है? अंदरूनी मतभेद और विदेश दौरे ने बढ़ाई दूरियां

थरूर बनाम कांग्रेस: क्या रिश्ता टूटने की कगार पर है? अंदरूनी मतभेद और विदेश दौरे ने बढ़ाई दूरियां

कांग्रेस नेता और पूरव केंद्रीय मंत्री शशि थरूर Shashi Tharoor एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार शशि थरूर को लेकर चर्चा इस बात की है कि क्या थरूर कांग्रेस छोड़ेंगे। सवाल ये इसलिए भी कि पिछले कई दिनों से कांग्रेस नेतृत्व और थरूर के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। इसलिए लगातार अब ये सवाल है कि क्या शशि थरूर कांग्रेस छोड़ेगे या फिर वो इंतजार करेंगे इस बात का कि कांग्रेस उन्हें निकाले। आइए समझने की कोशिश करते है कि – अगर सच में कांग्रेस और थरूर का ब्रेक अप होता है ऐसे में अगर पार्टी थरूर को निकालती है तो क्या साइड इफेक्ट होंगे और अगर थरूर पार्टी छोड़ते है तो किस तरह के राजनैतिक नफा और नुकसान उनको होंगे।

शशि थरूर और कांग्रेस में हैं मतभेद
दरअसल जब से शशि थरूर सांसदों के डेलीगेशन के साथ विदेश गए हैं तब से ही वो कांग्रेस नेताओं के निशाने पर आ गए है। पहले तो कांग्रेस पार्टी Congress Party ने उनका नाम डेलीगेशन के लिए नहीं दिया । उस पर केंद्र सरकार ने उनको न केवल अलग अलग देशों में भेजा बल्कि डेलीगेशन ही उनकी अगुवाई में गया। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने शशि थरूर को धोखेबाज तक कह डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को सलाह दे डाली वो थरूर को बीजेपी के सुपर प्रवक्ता बना दे और विदेश से वापस आने के पहले विदेश मंत्री का तमगा भी दे दे। हांलाकि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद कांग्रेस नेताओं ने बयानबाजी बंद कर दी । लेकिन शशि थरूर के ऑपरेशन सिदूंर को लेकर किए ट्वीट और फिर डेलीगेशन की अगुवाई में मीडिया में दिए उनके बयानों ने पार्टी और थरूर के बीच दूरिया और बढा दी। विदेश से लौटने के बाद भी थरूर पार्टी नेताओं के साथ नहीं देखे गए। इसलिए ये सवाल खड़े होने लगे कि क्या थरूर पार्टी छोड़ेगे या कांग्रेस उनको बाहर का रास्ता दिखाएगी।

थरूर क्यों इंतजार कर रहे हैं
दरअसल शशि थरूर अगर खुद कांग्रेस पार्टी छोडते है तो वो पार्टी से बाहर आने को राजनैतिक तौर पर कैश नहीं करा पाऐंगे। ऐसे में उनको सांसदी से इस्तीफा तो देना ही होगा साथ ही दूसरी बार चुनाव लड़ना और जीतकर आना दोनों ही चुनौती भरा होगा। अगर शशि थरूर पार्टी छोड़ते हैं तो कांग्रेस नेताओं की धोखेबाज जैसा बयान सच साबित हो जाऐंगे, साथ ही कांग्रेस को किसी तरह का राजनैतिक नुकसान सीधे तौर पर नहीं होगा। शशि थरूर ने कहा कि वो पिछले 16 साल से कांग्रेस में है कई बार सांसद भी रह चुके हैं उन्होंने कहा कि उनके और पार्टी के बीच में कुछ मतभेद है जिसे पर वो बैठकर बात करेंगे। शशि थरूर पार्टी के फैसले का इंतजार भी कर रहे है क्योंकि अगर पार्टी निकालती है तो वो खुद के लिए एक सहानभूति बटोर सकेंगे और पार्टी के निकालने का बहाना उनको किसी और पार्टी को ज्वाइन करने में भी आसान साबित होगा। यही कराण है कि थरूर इंतजार कर रहे हैं।

कांग्रेस क्यों नहीं कर रही अनुशासनात्मक कारवाई
कांग्रेस पार्टी खुद शशि थरूर पर किसी तरह की अनुशासनात्मक कारवाई नहीं कर रही। कांग्रेस पार्टी अगर ऐसा करती है तो सबसे पहले वो विदेश मामलों के जानकार नेता को खो देगी। इसके अलावा कांग्रेस ऐसा करती है तो ये मैसेज जाएगा कि पार्टी ने देशभक्ति की बात करने वाले सांसद को बाहर का रास्ता दिखा दिया । ऑपरेशन सिंदूर के डेलीगेशन की अगुवाई करने वाले नेता को पार्टी ने निकाल दिया। जिसका बड़े पैमाने पर कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। कांग्रेस अगर थरूर को निकालती है तो केरल में और युवाओं के बीच उसको नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योकि युवा वोटर थरूर को एक ऑइकान के तौर पर देखते हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी थरूर पर किसी तरह के एक्शन के मूड मे नही दिखाई दे रही।

प्रकाश कुमार पांडेय

 

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