टेलीकम्युनिकेशन बिल 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है। जिसके बाद अब यह कानून बन गया है। यह 20 दिसंबर को लोकसभा और 21 दिसंबर को राज्यसभा में पास हुआ था। टेलीकम्युनिकेशन कानून में फर्जी सिम लेने पर तीन साल जेल और 50 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। कानून में टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं को सिम कार्ड जारी करने से पहले अनिवार्य रूप से वायोमेट्रिक पहचान करने को कहा गया है। 138 साल पुराने टेलीग्राफ अधिनियम की जगह लेनेवाला यह बिल, सरकार को नागरिकों और राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर किसी भी टेलीकॉम सर्विस और नेटवर्क को संभालने के साथ बैन करने या उन्हें निलंबित करने की अनुमति प्रदान करता है।
- बदला गया 138 साल पुराना टेलीग्राफ अधिनियम
- टेलीकम्युनिकेशन कानून से लाइसेंसिंग सिस्टम में भी बदलाव
- फर्जी सिम लेने पर होगी 3 साल की सजा
- लगेगा 50 लाख रुपये का जुर्माना
- सिम के लिए अब जरुरी हुई बायोमेट्रिक पहचान
- आवश्यकता मैसेजेज इंटरसेप्ट कर सकेगी सरकार
इस बिल में उपभोक्ताओं को केंद्र में रखकर और उनके हितों को ध्यान में रखकर कानून में नए प्रावधान किये गए हैंं। इस नये टेलीकॉम बिल के अनुसार अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा या दूसरे देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों के हित के खिलाफ कोई भी काम करता है। अवैध रूप से दूरसंचार उपकरणों का उपयोग करता है तो उसे तीन साल तक की सजा सुनाई जा सकती है। इतना ही नहीं तगड़ा जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही अगर केंद्र सरकार उचित समझे तो ऐसे व्यक्ति की दूरसंचार सेवा निलंबित या समाप्त भी कर सकती है। इसके अलावा कोई भी महत्वपूर्ण दूरसंचार बुनियादी ढांचे और दूरसंचार नेटवर्क को नुकसान पहुंचाता है तो उससे नुकसान के एवज में मुआवजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना वसूला जाएगा। टेलीकम्युनिकेशन कानून से लाइसेंसिंग सिस्टम में भी बदलाव आएगा। वर्तमान में, सर्विस प्रोवाइडर्स को विभिन्न प्रकार की सर्विसेज के लिए ऑनलाइन दर्ज करा सके। बिल में टेलीकॉम स्पेक्ट्रम के एडमिनिस्ट्रेटिव एलॉकेशन का प्रावधान है, जिससे सर्विसेज की शुरूआत में तेजी आएगी। नए बिल से अमेरिकी बिजनेसमैन एलन मस्क की स्टारलिंक जैसी विदेशी कंपनियों को फायदा होगा। वहीं, जियो को इससे नुकसान हो सकता है। बिल के नए वर्जन में ओवर-द- टॉप (ओटीटी) एप्लीकेशन या इंटरनेट-बेस्ड कम्युनिकेशन एप्लीकेशन, जैसे जीमेल, वॉट्सएप, सिग्नल आदि को रेगुलेट करने की साफ तौर पर जानकारी नहीं है। बिल में टेलीकम्युनिकेशन, मैसेजिंग जैसे कीवर्ड की ब्रॉड डेफिनेशन दी गई है। इस कारण विभिन्न क्षेत्रों में चिंता है कि सरकार अभी भी ओटीटी और इंटरनेट-बेस्ड कम्युनिकेशन एप्लीकेशन्स को रेगुलेट करने का विकल्प चुन सकती है। पिछले साल जब टेलीकम्युनिकेशन बिल का ड्राफ्ट पेश किया गया था तो उसमें ओटीटी सर्विसेज भी दायरे में थी। इसे लेकर इंटरनेट कंपनीज और सिविल सोसाइटी ने भारी हंगामा किया था। इसी के बाद OTT को इस बिल से बाहर किया गया है। नए टेलीकम्युनिकेशन बिल के कानून सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से किसी भी टेलीकॉम सर्विस या नेटवर्क के टेक ओवर, मैनेजमेंट और उसे सस्पेंड करने की अनुमति देता है। युद्ध जैसी स्थिति में जरूरत पड़ने पर सरकार टेलीकॉम नेटवर्क पर मैसेजेज को इंटरसेप्ट भी कर सकेगी।
लाइसेंसिंग सिस्टम में बदलाव होगा
टेलीकम्युनिकेशन कानून से लाइसेंसिंग सिस्टम में भी बदलाव आएगा। वर्तमान में, सर्विस प्रोवाइडर्स को विभिन्न प्रकार की सर्विसेज के लिए अलग-अलग लाइसेंस, अनुमतियां, अनुमोदन और पंजीकरण लेना पड़ता है। ऐसे 100 से अधिक लाइसेंस या पंजीकरण हैं जो टेलीकॉम डिपार्टमेंट जारी करता है।
स्टारलिंक जैसी कंपनियों को मिलेगा फायदा
बिल में टेलीकॉम स्पेक्ट्रम के एडमिनिस्ट्रेटिव एलॉकेशन का प्रावधान है। जिससे सर्विसेज की शुरुआत में तेजी आएगी। नए बिल से अमेरिकी बिजनेसमैन एलन मस्क की स्टारलिंक जैसी विदेशी कंपनियों को फायदा होगा। वहीं, जियो को इससे नुकसान हो सकता है।
बिना नहीं नहीं भेजे जा सकेंगे प्रमोशनल मैसेज
इसमें यह भी अनिवार्य किया गया है कि कंज्यूमर्स को गुड्स, सर्विसेज के लिए विज्ञापन और प्रमोशनल मैसेज भेजने से पहले उनकी सहमति लेना जरुरी होगी। इसमें यह भी बताया कि टेलीकॉम सर्विसेज देने वाली कंपनी को एक ऑनलाइन मैकेनिज्म बनाना होगा। जिससे यूजर्स अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सके। बिल के नए वर्जन में ओवर-द-टॉप एप्लीकेशन या इंटरनेट-बेस्ड कम्युनिकेशन एप्लीकेशन, जैसे जीमेल, वॉट्सएप, सिग्नल आदि को रेगुलेट करने की साफ तौर पर जानकारी नहीं है। बिल में टेलीकम्युनिकेशन, मैसेजिंग जैसे कीवर्ड की ब्रॉड डेफिनेशन दी गई है। इसके चलते विभिन्न हलकों में चिंता है कि सरकार अभी भी ओटीटी और इंटरनेट-बेस्ड कम्युनिकेशन एप्लीकेशन्स को रेगुलेट करने का विकल्प चुन सकती है।




