रामपुर की जुड़वा बहनों के आगे फेल हुई टेक्नोलॉजी!…बायोमीट्रिक बना मुसीबत, विशेष तकनीकी समाधान से बने दोनों के आधार

Technology fails before the twin sisters from Rampur Find out what special solution the DM provided

रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जहाँ आधुनिक बायोमेट्रिक सिस्टम भी जुड़वा बहनों के सामने फेल हो गया। मामला आधार / पहचान पत्र बनने से जुड़ा है।

रामपुर की दो जुड़वा बहनें स्कूल में पढ़ती हैं। दोनों का चेहरा, फिंगर प्रिंट और रेटिना स्कैन तक एक जैसा है। जब दोनों का पहचान पत्र / आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो सिस्टम ने दोनों को एक ही व्यक्ति मान लिया। लंबे समय तक दूसरी बच्ची का पहचान पत्र नहीं बन सका। परिवार ने कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे, लेकिन हर बार बायोमेट्रिक मैच हो जाने के कारण एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाती थी।

DM ने दिया स्पेशल सॉल्यूशन

मामला जब रामपुर के जिलाधिकारी के पास पहुंचा तो उन्होंने खुद दोनों बच्चियों से मुलाकात की। पूरे मामले को समझने के बाद DM ने मानवता और तकनीक के बीच फंसे इस पेंच को सुलझाने के लिए स्पेशल परमिशन दी। DM के हस्तक्षेप के बाद अब दोनों बहनों की अलग-अलग पहचान सुनिश्चित करने के लिए मैनुअल वेरिफिकेशन और स्पेशल प्रोटोकॉल के तहत पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। तस्वीर में DM साहब के साथ खड़ी दोनों बहनें हाथ में अपना पहचान पत्र लिए मुस्कुरा रही हैं, ये तस्वीर अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। ये मामला बताता है कि भले ही टेक्नोलॉजी कितनी भी एडवांस हो जाए, लेकिन इंसानियत भरे फैसले ही सिस्टम की खामियों को दूर कर सकते हैं।

रामपुर में दो जुड़वा बहनों के लिए पहचान की तकनीक ही कई साल तक परेशानी की वजह बनी रही। फिंगरप्रिंट और आंखों के बायोमीट्रिक डेटा में समानता के कारण एक बच्ची का आधार बन गया, लेकिन दूसरी का आवेदन बार-बार डुप्लीकेट डेटा बताकर अटकता रहा। आखिरकार जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी की पहल पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय ने विशेष तकनीकी समाधान निकाला। इसके बाद दोनों बहनों के अलग-अलग आधार जारी हो सके।

रामपुर नगर के मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इलियास की जुड़वा बेटियां तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर हैं। परिवार जब दोनों बच्चियों का आधार बनवाने पहुंचा, तो नामांकन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी अड़चन सामने आई। एक बच्ची का पंजीकरण हो जाने के बाद दूसरी बच्ची के बायोमीट्रिक डेटा का मिलान पहले से दर्ज रिकॉर्ड से होने लगा। नतीजतन, दूसरी बच्ची का आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहा था। परिवार ने स्थानीय स्तर पर कई प्रयास किए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। आधार नहीं बन पाने के कारण स्कूल में प्रवेश और सरकारी योजनाओं से जुड़े कामों को लेकर भी परिवार परेशान था।

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