आज 25 सितंबर 2026, अनंत चतुर्दशी के मौके पर देशभर में गणपति बप्पा को विदाई दी जा रही है। दस दिनों तक चले गणेशोत्सव के बाद मुंबई से दिल्ली, हैदराबाद से झांसी तक विसर्जन जुलूसों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ भीड़ संभालने की नहीं, बल्कि सुरक्षा, यातायात और जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने की भी है।
मुंबई में 25 हजार से ज्यादा जवान, 383 कृत्रिम कुंड
मुंबई में गणेश विसर्जन को लेकर बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। शहर में 25 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। विसर्जन के लिए 383 कृत्रिम कुंड तैयार किए गए हैं, ताकि प्राकृतिक जलस्रोतों पर दबाव कम किया जा सके। गिरगांव चौपाटी समेत प्रमुख विसर्जन स्थलों पर वॉच टावर, सीसीटीवी और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं। एआई आधारित कैमरों के जरिए भीड़ की निगरानी और संवेदनशील गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
हैदराबाद में 10 हजार कैमरों से निगरानी
हैदराबाद में भी गणेश विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। भीड़ और यातायात नियंत्रण के लिए 25 से 30 हजार जवानों की तैनाती की गई है। करीब 10 हजार सीसीटीवी कैमरों के जरिए शहर के प्रमुख इलाकों और विसर्जन मार्गों पर निगरानी रखी जा रही है।
दिल्ली में यमुना की जगह कृत्रिम तालाब
दिल्ली में प्रशासन ने विसर्जन के साथ पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया है। यमुना में प्रतिमाओं के विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 81 स्थानों पर कृत्रिम तालाब तैयार किए गए हैं। इसके अलावा पुरानी और खंडित मूर्तियों तथा पूजा सामग्री के सम्मानजनक निस्तारण के लिए 110 विशेष संग्रह केंद्र बनाए गए हैं। यानी दिल्ली में व्यवस्था का फोकस सिर्फ भीड़ नियंत्रण नहीं, बल्कि विसर्जन के बाद होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने पर भी है।
चंद्रपुर का बड़ा विसर्जन कुंड
महाराष्ट्र के चंद्रपुर में भी पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है। यहां करीब 800 वर्ग मीटर क्षेत्र में 30 लाख लीटर पानी की क्षमता वाला विसर्जन कुंड तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था के साथ जलस्रोतों के संरक्षण का संतुलन बनाए रखना है।
झांसी में शोभायात्रा, हर जगह सुरक्षा पर नजर
उत्तर प्रदेश के झांसी में भी गणपति विसर्जन को लेकर भव्य शोभायात्राएं निकाली जा रही हैं। प्रशासन ने विसर्जन मार्गों पर सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम किए हैं।
कुल मिलाकर इस बार गणेश विसर्जन की तस्वीर में आस्था और प्रशासनिक तैयारी दोनों साथ दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ सड़कों पर ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारे गूंज रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन की चुनौती है कि श्रद्धालुओं की आस्था के इस महासैलाब को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से उसके अंतिम पड़ाव तक पहुंचाया जाए। मुंबई की चौपाटी से दिल्ली के कृत्रिम तालाबों तक संदेश साफ है—गणपति को विदाई भी श्रद्धा से हो और प्रकृति की रक्षा भी पूरी जिम्मेदारी से।





