बिहार के एक पुराने भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट उस वक्त चौंक गया, जब उसे बताया गया कि केस में जब्त किए गए नोट चूहों द्वारा कुतरकर नष्ट कर दिए गए। अदालत ने इस दलील को न सिर्फ अविश्वसनीय बताया, बल्कि इसे न्याय व्यवस्था और सरकारी सिस्टम की गंभीर विफलता करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा—सबूतों की सुरक्षा में ऐसी चूक न्याय पर बड़ा सवाल खड़ा करती है
Supreme Court of India की बेंच, जिसमें Justice J.B. Pardiwala और Justice K.V. Viswanathan शामिल थे, ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताया। कोर्ट ने साफ कहा कि जब्त किए गए पैसों का इस तरह नष्ट हो जाना राज्य के राजस्व की भारी क्षति है और यह स्वीकार करने योग्य नहीं है।
2014 का रिश्वत मामला—जब्त किए गए 10 हजार रुपये बने विवाद की जड़
यह मामला साल 2014 का है, जब एक महिला सीडीपीओ पर 10 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा था। जांच के दौरान रकम जब्त की गई थी, लेकिन बाद में यह सामने आया कि मालखाने में रखे नोट सुरक्षित नहीं रह पाए। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी नाराज़गी जताई और पूछा कि आखिर ऐसी स्थिति पैदा कैसे हुई।
‘चूहों ने खा लिए नोट’—कोर्ट ने कहा यह तर्क भरोसे के काबिल नहीं
सुनवाई के दौरान अधिकारियों की ओर से यह कहा गया कि चूहों ने नोट कुतर दिए, जिससे वे बेकार हो गए। इस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा स्पष्टीकरण न तो तार्किक है और न ही विश्वसनीय। अदालत ने यह भी आशंका जताई कि यदि इस तरह की लापरवाही जारी रही, तो कई अन्य मामलों में भी सबूत खतरे में पड़ सकते हैं।
जमानत मिली, लेकिन सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
फिलहाल कोर्ट ने आरोपी महिला की सजा पर रोक लगाते हुए उसे जमानत दे दी है। गौरतलब है कि ट्रायल कोर्ट ने पहले उसे बरी कर दिया था, जबकि हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया था। अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले में आगे सुनवाई के दौरान यह भी जांच करेगा कि सरकारी मालखानों में सबूतों की सुरक्षा को लेकर क्या खामियां हैं।
प्रशासनिक लापरवाही या सिस्टम की बड़ी खामी?
यह घटना सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताती है कि सरकारी तंत्र में सबूतों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर कमी है। अगर जब्त की गई नकदी ही सुरक्षित नहीं है, तो न्याय की प्रक्रिया पर भरोसा कैसे कायम रहेगा? सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी अब सिस्टम को सुधारने की दिशा में एक बड़ी चेतावनी मानी जा रही है।





