भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन कमजोर शुरुआत की, जहां अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की तेज होती कीमतों ने बाजार की दिशा बिगाड़ दी। शुरुआती घंटों में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख इंडेक्स दबाव में आ गए, जिससे निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ गई।
सुबह की शुरुआत से ही बाजार में दिखी कमजोरी, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा
शुक्रवार सुबह बाजार खुलते ही गिरावट का माहौल देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स करीब 180 अंकों की गिरावट के साथ 77,484 के स्तर पर खुला। हालांकि, जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बिकवाली और तेज होती गई और सेंसेक्स लगभग 500 अंकों तक फिसल गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 147 अंकों की गिरावट के साथ 24,025 के स्तर पर आ गया, जो बाजार में जारी दबाव को साफ दिखाता है।
आईटी और फार्मा सेक्टर में बिकवाली का दबाव, बड़े शेयरों में गिरावट हावी
आज के कारोबार में आईटी और फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में नजर आए। खासकर Infosys के शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह टॉप लूजर बन गया। इसके अलावा HCL Tech, TCS, Sun Pharma और ICICI Bank जैसे दिग्गज शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। निवेशकों ने इन सेक्टरों में मुनाफावसूली करते हुए बिकवाली बढ़ाई, जिससे बाजार और नीचे खिंच गया।
कुछ शेयरों ने दिखाई मजबूती, इन कंपनियों ने संभाला मोर्चा
जहां एक तरफ बाजार में गिरावट हावी रही, वहीं कुछ कंपनियों के शेयरों ने मजबूती दिखाई। Mahindra & Mahindra, Larsen & Toubro (L&T), Hindustan Unilever, Indigo और Nestle India जैसे शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। इन कंपनियों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन overall sentiment कमजोर ही रहा।
अमेरिका का एंटी-डंपिंग कदम बना दबाव का कारण, भारत पर बड़ा असर
वैश्विक स्तर पर भी एक बड़ा फैक्टर बाजार पर भारी पड़ा। अमेरिका के कॉमर्स डिपार्टमेंट ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयात होने वाले सोलर सेल और पैनल्स पर शुरुआती एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की घोषणा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत से आने वाले उत्पादों पर 123.04 प्रतिशत तक की भारी ड्यूटी प्रस्तावित की गई है। वहीं इंडोनेशिया पर 35.17 प्रतिशत और लाओस पर 22.46 प्रतिशत शुल्क तय किया गया है। यह कदम एशियाई देशों से सोलर इंपोर्ट को नियंत्रित करने की दिशा में उठाया गया है, जिसका असर भारतीय कंपनियों और बाजार भावना पर भी पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बढ़ाई टेंशन, बाजार पर पड़ा सीधा असर
दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत 1.34 प्रतिशत बढ़कर 97.14 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं ब्रेंट क्रूड भी 1.36 प्रतिशत की तेजी के साथ 106.58 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। इसके अलावा COMEX पर भी कीमतों में करीब 0.96 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे शेयर बाजार पर नकारात्मक असर पड़ता है।
निष्कर्ष: दबाव में बाजार, आगे भी रह सकती है अस्थिरता
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।