Stock Market Crash: 2 अप्रैल को शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 1300 अंक टूटा, निवेशकों के 10 लाख करोड़ डूबे

शुरुआती कारोबार में ही बाजार में भारी बिकवाली से मचा हड़कंप

गुरुवार 2 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। सुबह बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव बढ़ गया और प्रमुख सूचकांक लाल निशान पर पहुंच गए। दोपहर करीब 12:30 बजे तक बीएसई सेंसेक्स लगभग 1300 अंक गिर चुका था, जबकि एनएसई निफ्टी 50 करीब 415 अंकों की कमजोरी के साथ ट्रेड कर रहा था। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में कमजोरी का माहौल दिखाई दिया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

मार्केट कैप में बड़ी गिरावट से निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये घटे

इस तेज गिरावट का असर कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप घटकर करीब 412 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। अनुमान है कि शुरुआती कारोबार के दौरान ही निवेशकों को लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अचानक आई इस गिरावट ने छोटे और बड़े निवेशकों दोनों को प्रभावित किया है, जिससे बाजार में घबराहट का माहौल बन गया।

अमेरिका और मिडिल ईस्ट तनाव ने बढ़ाई वैश्विक अनिश्चितता

बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय हालात को माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान को लेकर संभावित सैन्य कार्रवाई की चर्चा से वैश्विक निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता बढ़ने से निवेशकों ने जोखिम लेने से दूरी बनाई, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार को नहीं मिल रहा सहारा

पिछले कई कारोबारी सत्रों से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार बुधवार को भी विदेशी निवेशकों ने करीब 8,331 करोड़ रुपये की बिकवाली की। लगातार 22 ट्रेडिंग सेशन से जारी इस निकासी ने बाजार की मजबूती को कमजोर किया है। विदेशी निवेश घटने से बाजार में सपोर्ट कम हो गया, जिससे गिरावट और गहरी हो गई।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और एशियाई बाजारों की कमजोरी का असर

ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में भी हलचल देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 6 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई और भाव 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गए। वहीं WTI क्रूड भी 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर शेयर बाजार पर पड़ता है। इसके अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और हांगकांग के बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे भारतीय बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

नोट: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। liveindia.news अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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