सोना-चांदी खरीदने का कर रहे हैं विचार? चांदी की कीमतों में आ सकती है बड़ी गिरावट, 1980 और 2011 जैसा पैटर्न बनने की चर्चा
चांदी की कीमतों में तेजी के बाद आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। साल 2026 की शुरुआत में चांदी ने ऊंचे भाव के कारण बाजार में खूब सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन इसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव और तेज गिरावट देखने को मिली। अब बाजार विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा है कि चांदी की कीमतों पर दबाव आगे भी बना रह सकता है। कुछ विश्लेषक मौजूदा बाजार के पैटर्न की तुलना 1980 और 2011 की बड़ी गिरावटों से कर रहे हैं। ऐसे में सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के मन में सवाल है कि क्या नया साल आने तक चांदी और सस्ती हो सकती है?
1980 और 2011 की गिरावट से क्यों हो रही है तुलना?
चांदी के इतिहास में 1980 और 2011 की गिरावट को बड़ी घटनाओं के रूप में देखा जाता है। जनवरी 1980 में तेजी के बाद चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई थी। इसी तरह अप्रैल 2011 में करीब 48.70 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने के बाद चांदी लंबे समय तक कमजोर रही। 2011 के बाद जून 2013 तक कीमतें करीब 18 डॉलर और नवंबर 2015 में लगभग 13 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थीं। मौजूदा गिरावट के बाद बाजार विशेषज्ञ इन दोनों पुराने दौर से तुलना कर रहे हैं। हालांकि इतिहास में ऐसा हुआ है, इसका अर्थ यह नहीं कि 2026 में भी वैसी ही गिरावट दोहराई जाएगी।
30 अक्टूबर को चांदी करीब 58 प्रतिशत टूटी
फ्री प्रेस जर्नल की 30 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कॉमेक्स पर चांदी ने 29 जनवरी 2026 को 121.67 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद 30 अक्टूबर तक कीमत करीब 51 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गई। इस तरह रिकॉर्ड ऊंचाई से इसमें लगभग 58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, 50 से 53 डॉलर का स्तर फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। यदि बिकवाली और बढ़ती है तो 48 से 49 डॉलर का स्तर भी बाजार की नजर में रहेगा।
चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे क्या कारण हैं?
चांदी की कीमतों पर कई अंतरराष्ट्रीय कारण असर डाल रहे हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ब्याज दरें बढ़ने की आशंका और निवेशकों की बिकवाली से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा सौर ऊर्जा उद्योग में चांदी की खपत को कम करने की कोशिश और औद्योगिक मांग में कमजोरी भी कीमतों के लिए चुनौती बन रही है। रॉयटर्स की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट में भी बताया गया कि ऊंची ब्याज दरों और मजबूत डॉलर के कारण चांदी पर दबाव है।
क्या नया साल आने तक और सस्ती होगी चांदी?
चांदी में आगे भी उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है, लेकिन सभी विशेषज्ञ लगातार गिरावट की भविष्यवाणी नहीं कर रहे हैं। कुछ विश्लेषकों को कमजोरी जारी रहने की आशंका है, जबकि बाजार में सुधार की संभावना भी देखी जा रही है। उदाहरण के लिए, WisdomTree के विश्लेषक नितेश शाह ने अक्टूबर में जारी अपने अनुमान में 2027 की तीसरी तिमाही तक चांदी के 70 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचने की संभावना जताई है। दूसरी ओर, औद्योगिक मांग कमजोर रहने पर तेजी सीमित हो सकती है।
खरीदारों के लिए जरूरी बात: अगर आप सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो केवल गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न करें। चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है। खरीदारी से पहले बाजार भाव, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और अपनी जरूरत का आकलन करें। याद रखें, 58 प्रतिशत की गिरावट के बाद भी कीमतें और गिरेंगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।





