झारखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच रिश्तों में खटास के संकेत मिल रहे हैं। JMM के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के बयान ने सियासी हलकों में खलबली मचा दी है। उन्होंने कहा कि “जब तक कांग्रेस हमारे साथ है, तब तक संथाल परगना कांग्रेस के साथ है”, यानी साफ संकेत कि कांग्रेस की पकड़ इस क्षेत्र में JMM के सहारे ही बनी हुई है।
झारखंड में संथाल परगना को लेकर JMM-कांग्रेस की खींचतान
क्या महागठबंधन टूट की ओर?
JMM का तीखा बयान
JMM नेताओं का मानना है कि संथाल परगना में जनता का विश्वास हेमंत सोरेन और पार्टी के प्रति है। 2024 विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र की 18 में से 17 सीटें महागठबंधन को मिली थीं, जिनमें JMM को अकेले 11 सीटें मिलीं। वहीं सुप्रियो भट्टाचार्य ने स्पष्ट कहा “जब तक कांग्रेस हमारे साथ है, तब तक संथाल परगना कांग्रेस के साथ है। इस बयान का साफ मतलब है कि JMM का मानना है कि कांग्रेस को संथाल परगना में जो भी राजनीतिक सफलता मिल रही है, वह JMM के कंधे पर सवार होकर ही है।
कांग्रेस का जवाब..तो एक सिक्का हो जाएगा खोटा
इस टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। प्रदेश महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा कि “हम गठबंधन के दो पहलू हैं। एक भी पहलू अलग हुआ तो सिक्का खोटा हो जाएगा।” उन्होंने JMM को गठबंधन धर्म निभाने की सलाह दी और बताया कि कांग्रेस का संथाल परगना में अपना आधार है।
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश सिन्हा ने दो टूक कहा “हम गठबंधन के दो पहलू हैं। एक भी निकला तो सिक्का खोटा हो जाएगा। उन्होंने JMM को सावधानी और संयम की नसीहत दी और कहा कि संथाल में कांग्रेस का भी स्वतंत्र जनाधार है। साथ ही ये भी दोहराया कि महागठबंधन की जीत संयुक्त प्रयास का नतीजा है।
2024 चुनाव: सीटों का बंटवारा
JMM – 11 सीटें
कांग्रेस – 4 सीटें
राजद – 2 सीटें
BJP – 1 सीट (जरमुंडी)
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बरहेट सीट से चुनाव जीतकर सत्ता हासिल की, जो संथाल परगना का ही हिस्सा है। झारखंड की सियासत में खिचड़ी पकने लगी है। संथाल परगना बना JMM-कांग्रेस संबंध का टेस्टिंग ग्राउंड। झारखंड की राजनीति इन दिनों संथाल परगना के इर्द-गिर्द सिमटती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सत्तारूढ़ महागठबंधन (JMM, कांग्रेस, RJD) के बीच सार्वजनिक बयानबाज़ी और अंतर्विरोध उभरने लगे हैं। JMM के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य का हालिया बयान इसी बढ़ती खटास की ओर इशारा करता है।
क्या टूट की ओर है गठबंधन?
गठबंधन के घटक दलों में तालमेल की कमी, नेताओं की बयानबाजी में कटुता, और सहक्रियता के बजाय श्रेय लेने की होड़ यह दिखा रही है कि महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं।
बीजेपी ने ली चुटकी
झारखंड भाजपा ने इस बयानबाजी को लेकर चुटकी ली है। प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि महागठबंधन का गठन ही सत्ता और लाभ के लिए हुआ था और अब उसमें दरार स्पष्ट दिख रही है। भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने तीखा तंज कसते हुए कहा “यह गठबंधन सिर्फ सत्ता और लूट के लिए बना है। पांच साल से पहले ही दरार बढ़ेगी।
संथाल परगना का सियासी गणित
2024 विधानसभा चुनाव में 18 सीटों में
JMM – 11 सीटें
कांग्रेस – 4 सीटें
राजद – 2 सीटें
BJP – 1 सीट (जरमुंडी)
बरहेट, जहां से हेमंत सोरेन जीतकर CM बने
संथाल परगना के प्रभाव को लेकर JMM-कांग्रेस में शुरू हुई जुबानी जंग महागठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर रही है। अगर यह खींचतान बढ़ी, तो गठबंधन में दरार पड़ना तय है, जिसका राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल सकता है। आने वाला समय बताएगा कि यह खिचड़ी पकेगी या पकते-पकते गठबंधन का स्वाद बिगाड़ देगी। …(प्रकाश कुमार पांडेय)