भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार के कारोबार के दौरान शुरुआती कमजोरी के बाद खरीदारी लौट आई। हेल्थकेयर, फार्मा और सरकारी बैंकिंग शेयरों में मजबूती के चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37 प्रतिशत चढ़कर 77,656.09 पर, जबकि निफ्टी 115.50 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,334.55 पर बंद हुआ। हालांकि बाजार में तेजी के बावजूद कुछ सेक्टर दबाव में भी रहे।
हेल्थकेयर और फार्मा शेयरों ने बाजार को संभाला, अडानी एंटरप्राइजेज टॉप गेनर्स में रहा
मंगलवार को निफ्टी के कई प्रमुख शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। अडानी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट और अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे। इन कंपनियों में मजबूती का असर बाजार के समग्र रुख पर भी दिखाई दिया। सेक्टर के स्तर पर हेल्थकेयर और फार्मा कंपनियों के साथ सरकारी बैंकों के शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।
मिडकैप में बढ़त लेकिन स्मॉलकैप थोड़ा फिसला, सेक्टरों का प्रदर्शन रहा मिला-जुला
व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.54 प्रतिशत ऊपर रहा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.10 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक ने बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी मेटल इंडेक्स में दबाव देखने को मिला।
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का असर उम्मीद से कम रहा, कच्चे तेल की कीमतों को मिली राहत
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान को लेकर अमेरिका की बहुप्रतीक्षित पाबंदियों का असर बाजार की उम्मीदों के मुकाबले कम रहा। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में हाल की ऊंचाई से कुछ नरमी आई। इससे भारतीय बाजार को भी राहत मिली और मासिक एक्सपायरी के दिन कारोबार सकारात्मक रुख के साथ समाप्त हुआ। हालांकि, भू-राजनीतिक घटनाक्रम अब भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय बना हुआ है।
महंगाई के आंकड़ों और फेड चेयर के बयान पर नजर, बाजार में आगे भी सतर्कता की उम्मीद
अब निवेशकों की नजर आने वाले महंगाई के आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन की टिप्पणियों पर रहेगी। इनसे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर आगे की दिशा का संकेत मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और तेल की कीमतों तथा बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे माहौल में भारतीय शेयर बाजार में निकट अवधि में सावधानी जारी रहने की संभावना है।





