मंगलवार का कारोबारी सत्र शेयर बाजार के निवेशकों के लिए भारी रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, बॉन्ड यील्ड बढ़ने और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का असर घरेलू बाजार पर दिखाई दिया। इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹9 लाख करोड़ की कमी आई। हालांकि, बुधवार को बाजार ने शुरुआती कारोबार में कुछ मजबूती दिखाई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।
मंगलवार की गिरावट के बाद बुधवार को बाजार ने तेजी के साथ कारोबार शुरू किया
बुधवार को सेंसेक्स की शुरुआत 74,249.31 के स्तर पर हुई और शुरुआती कारोबार में इसमें करीब 450 अंकों की तेजी दिखाई दी। वहीं, निफ्टी भी बढ़त के साथ 23,576.15 पर खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 शेयर बढ़त में रहे, जबकि 6 शेयरों में कमजोरी दिखाई दी। इस दौरान कोटक महिंद्रा बैंक सबसे ज्यादा बढ़ने वाला शेयर रहा, जबकि मारुति टॉप लूजर रही।
सुबह 9:56 बजे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते दिखे
सुबह 9:56 बजे तक बाजार की तेजी बरकरार रही। सेंसेक्स 0.50 फीसदी चढ़कर 368.88 अंक की बढ़त के साथ 74,372.70 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी में भी 0.42 फीसदी की मजबूती दर्ज हुई और यह 96.30 अंक बढ़कर 23,214.90 पर पहुंच गया। यानी मंगलवार की बड़ी गिरावट के बाद बुधवार के शुरुआती कारोबार में बाजार में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।
15 सितंबर को सेंसेक्स करीब 1430 अंक गिरकर बंद हुआ था
इससे एक दिन पहले यानी 15 सितंबर को बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर 75,436.44 से करीब 1430 अंक नीचे फिसलकर कारोबार के अंत में 74,003.82 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 23,576.15 पर खुलने के बाद दिन में 23,592.85 तक पहुंचा, लेकिन कारोबार खत्म होने तक गिरकर 23,118.60 पर आ गया। इस गिरावट के पीछे वैश्विक तनाव और बाजार से जुड़ी कई चिंताएं प्रमुख कारण रहीं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों ने की खरीदारी
मंगलवार को घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने 2,686 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसके विपरीत विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने 2,978 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इससे बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ा। निवेशकों की नजर अब विदेशी पूंजी के रुख और वैश्विक घटनाक्रम पर बनी हुई है।
पश्चिम एशिया का तनाव और महंगा कच्चा तेल आगे भी बाजार को प्रभावित कर सकता है
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष आने वाले दिनों में शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक रह सकता है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड का 5 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर तक पहुंचना वैश्विक इक्विटी बाजार पर दबाव बढ़ा सकता है। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से मैक्रो-इकोनॉमिक परिस्थितियों पर असर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों की नजर मध्य एशिया के तनाव और खासकर होर्मुज में किसी तरह के व्यवधान पर भी बनी हुई है।