भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला लगातार दूसरे कारोबारी दिन भी जारी रहा। गुरुवार सुबह बाजार ने मजबूत शुरुआत की और निवेशकों में खरीदारी का उत्साह साफ दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 399 अंकों की बढ़त के साथ 77,391 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 104 अंकों की छलांग लगाकर 24,125 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, टेक्नोलॉजी शेयरों में खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने घरेलू बाजार का माहौल पूरी तरह बदल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशकों का भरोसा लौटता दिख रहा है और विदेशी संकेत भी भारतीय बाजार को मजबूती दे रहे हैं।
एशियाई बाजारों में जोरदार उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को दिया मजबूत सहारा
एशियाई शेयर बाजारों में आई तेज रिकवरी का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन के उम्मीद से बेहतर नतीजों और क्वालकॉम की मजबूत आय अनुमान ने पूरी दुनिया के टेक सेक्टर में नई ऊर्जा भर दी। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 3.37 प्रतिशत तक चढ़ गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4.89 से 5.5 प्रतिशत तक उछला। हांगकांग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट भी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। इन सकारात्मक संकेतों ने भारतीय निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और शुरुआती कारोबार में खरीदारी तेज हो गई।
आईटी कंपनियों में खरीदारी लौटने से बाजार को मिली नई रफ्तार
आज के कारोबार में सबसे अधिक मजबूती आईटी सेक्टर में देखने को मिली। टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसे दिग्गज शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स भी मजबूती के साथ ऊपर चढ़ा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर सेक्टर में वैश्विक मांग बढ़ने के संकेतों ने भारतीय आईटी कंपनियों के प्रति निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि वैश्विक टेक कंपनियों के बेहतर नतीजों का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में भारतीय आईटी शेयरों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
कच्चे तेल में गिरावट और अमेरिकी बाजार के संकेत बने निवेशकों के लिए राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 1.52 प्रतिशत टूटकर करीब 72.40 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 69.15 से 69.30 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार करता दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में प्रगति तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने की खबरों ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनाया। इसका फायदा भारत जैसे तेल आयातक देशों को मिल सकता है। दूसरी ओर अमेरिकी फ्यूचर्स मार्केट भी बढ़त में रहा, जहां एसएंडपी 500 और नैस्डैक फ्यूचर्स में क्रमशः 0.5 और 1.9 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
महंगाई के आंकड़ों और डॉलर की चाल पर रहेगी निवेशकों की अगली नजर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अब निवेशकों की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर नीति पर टिकी हुई है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ 101.64 पर पहुंच गया, जबकि भारतीय रुपया पिछले कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले 0.08 प्रतिशत मजबूत होकर 94.66 पर बंद हुआ था। यदि वैश्विक हालात अनुकूल बने रहते हैं और विदेशी निवेश जारी रहता है, तो घरेलू शेयर बाजार में तेजी का यह रुख अगले कुछ सत्रों तक कायम रह सकता है।