पासपोर्ट को लेकर सरकार की बड़ी सफाई! विदेश मंत्रालय ने बताया—यह यात्रा का दस्तावेज, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं

भारतीय पासपोर्ट को लेकर लंबे समय से लोगों के बीच बनी भ्रम की स्थिति पर अब विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट रुख सामने रखा है। मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय पासपोर्ट केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेश में पहचान के लिए जारी किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब पासपोर्ट, आधार और वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों की वैधता और उपयोग को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। इसी दौरान सरकार ने पासपोर्ट सेवाओं में हुए बड़े सुधारों और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती यात्रा सुविधाओं की भी जानकारी साझा की।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट का उद्देश्य यात्रा है, नागरिकता तय करना नहीं

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य विदेश यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराना और दूसरे देशों में पहचान स्थापित करना है। इसलिए इसे नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण मानना सही नहीं होगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकता से जुड़े मामलों में अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं और दस्तावेज लागू होते हैं। हाल के वर्षों में आधार कार्ड और वोटर आईडी को लेकर भी इसी तरह की चर्चाएं सामने आती रही हैं।

पासपोर्ट बनवाना हुआ पहले से आसान, अब कुछ मामलों में सिर्फ पांच दिन में मिल रहा दस्तावेज

सरकार ने बताया कि डिजिटल व्यवस्था और नई तकनीकों के कारण पासपोर्ट सेवाओं में बड़ा बदलाव आया है। अब कई मामलों में पासपोर्ट केवल पांच कार्यदिवस के भीतर जारी किया जा रहा है। वहीं पासपोर्ट सेवा केंद्रों में आवेदकों को औसतन 45 मिनट से भी कम समय देना पड़ रहा है। देशभर में पासपोर्ट सेवा नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया गया है और अब 545 पासपोर्ट सेवा केंद्र काम कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक हर लोकसभा क्षेत्र में कम से कम एक पासपोर्ट सुविधा केंद्र उपलब्ध कराना है। इसी वर्ष 20 नए पासपोर्ट सेवा केंद्र शुरू करने की भी तैयारी है।

ई-पासपोर्ट और वैश्विक यात्रा सुविधाओं से भारतीय नागरिकों को मिलेगा बड़ा लाभ

सरकार ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष मई से जारी होने वाले सभी नए भारतीय पासपोर्ट में सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाई जा रही है। यह ई-पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे दस्तावेज की सुरक्षा बढ़ेगी, फर्जीवाड़ा कम होगा और अंतरराष्ट्रीय इमिग्रेशन प्रक्रिया भी अधिक तेज और सुरक्षित बनेगी। इसके अलावा भारत ने 25 देशों के साथ 27 मोबिलिटी समझौते किए हैं, जिससे छात्रों, पेशेवरों, शोधकर्ताओं और कामकाजी लोगों के लिए विदेश जाना पहले की तुलना में अधिक आसान हो रहा है।

विदेश में रोजगार और भारतीय यात्रियों के लिए सरकार ने बढ़ाया सहयोग का दायरा

सरकार के अनुसार फिलहाल भारत की केवल लगभग 10 प्रतिशत आबादी के पास पासपोर्ट है, इसलिए अधिक से अधिक लोगों तक यह सुविधा पहुंचाना प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि 27 देश भारतीय पासपोर्ट धारकों को वीजा-फ्री प्रवेश देते हैं, 47 देश वीजा ऑन अराइवल और 66 देश ई-वीजा की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। ई-माइग्रेट 2.0 पोर्टल के माध्यम से अक्टूबर 2022 से अब तक करीब 7 लाख भारतीय कामगारों को विदेश जाने की मंजूरी दी जा चुकी है। सरकार खाड़ी देशों और सिंगापुर में भारतीय महिलाओं के लिए सहायता केंद्र भी चला रही है, जहां कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का उद्देश्य पासपोर्ट को अधिक से अधिक भारतीयों तक पहुंचाना और सुरक्षित, पारदर्शी तथा व्यवस्थित अंतरराष्ट्रीय यात्रा को बढ़ावा देना है।

 

 

 

 

 

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