Share Market Today: शेयर बाजार में दमदार शुरुआत, लेकिन ग्लोबल तनाव से निवेशकों की धड़कनें तेज

22 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में खुले। हालांकि बाजार विशेषज्ञ अभी भी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली, महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपया बाजार के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी ने दिखाई मजबूती

शुक्रवार सुबह BSE Sensex करीब 128 अंकों की बढ़त के साथ 75,312 पर खुला, जबकि Nifty 50 ने 34 अंकों की तेजी के साथ 23,689 का स्तर छुआ। एशियाई बाजारों में आई मजबूती का असर सीधे भारतीय बाजार पर दिखाई दिया। GIFT Nifty भी करीब 130 अंक ऊपर कारोबार करता दिखा, जिससे संकेत मिले कि घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल बन सकता है। शुरुआती घंटों में निवेशकों ने आईटी और ऑटो शेयरों में अच्छी दिलचस्पी दिखाई।

अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद से ग्लोबल बाजार में राहत

दुनियाभर के निवेशकों की नजर इस समय पश्चिम एशिया की स्थिति पर टिकी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की संभावना से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में राहत देखने को मिली है। जापान, दक्षिण कोरिया और दूसरे एशियाई बाजारों में भी तेजी दर्ज की गई। हालांकि दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल चिंता बढ़ा रहा है। भारत जैसे आयात आधारित देश के लिए महंगा तेल आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। इसी वजह से निवेशक अभी पूरी तरह निश्चिंत नजर नहीं आ रहे।

एक दिन पहले बाजार में मुनाफावसूली से आई थी कमजोरी

21 मई को बाजार में शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग की थी। सेंसेक्स करीब 135 अंक गिरकर 75,183 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 23,654 के आसपास बंद हुआ। पूरे दिन बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। शुरुआत में खरीदारी का माहौल था, लेकिन बाद में बैंकिंग और FMCG सेक्टर में बिकवाली बढ़ गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशक अभी हर तेजी पर मुनाफा निकालने की रणनीति अपना रहे हैं, क्योंकि वैश्विक हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।

आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की खास नजर

आज के कारोबार में सबसे ज्यादा फोकस आईटी और ऑटो कंपनियों पर रहने की संभावना है। रुपये में कमजोरी आने से आईटी कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इनकी कमाई का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। वहीं ऑटो सेक्टर में भी खरीदारी का माहौल बन सकता है। इसके अलावा तेल और गैस कंपनियों के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। अगर तेल और महंगा हुआ तो इससे कई सेक्टरों की लागत बढ़ सकती है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर रुपया बढ़ा रहे दबाव

विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FIIs लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम एशिया संकट के बाद विदेशी निवेशकों ने बड़ी मात्रा में बिकवाली की है। यही कारण है कि बाजार में तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पा रही। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी चिंता का विषय बनी हुई है। हाल ही में रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया था। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक ग्लोबल हालात स्थिर नहीं होते और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

निवेशकों के लिए आगे क्या रहेगा सबसे अहम संकेत?

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर निफ्टी 23,800 के ऊपर मजबूती से टिकता है तो बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं नीचे की तरफ 23,500 का स्तर काफी अहम माना जा रहा है। निवेशकों की नजर अब अमेरिका-ईरान विवाद, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक इन्हीं फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार में सकारात्मक शुरुआत जरूर दिख रही है, लेकिन जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

नोट: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। liveindia.news अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

 

 

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