ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। सप्ताह की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, जहां निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया है। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में हल्की रिकवरी भी देखने को मिली, जिससे निवेशकों को थोड़ी राहत मिली।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर स्पष्ट दिखाई दिया
सोमवार को बाजार खुलते ही बीएसई सेंसेक्स 1018 अंक गिरकर 72,565 पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 269 अंकों की कमजोरी के साथ 22,549 के स्तर पर खुला। कुछ समय बाद बाजार में हल्की सुधार देखने को मिली और सेंसेक्स 544 अंक की गिरावट के साथ 73,038 पर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 136 अंक नीचे 22,683 पर ट्रेड करता नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव के कारण निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों की चिंता बढ़ी, बाजार पर दबाव बना
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष पांचवें सप्ताह में पहुंच चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 115 से 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है, जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर रुपये ने भी बाजार की चाल प्रभावित की
मार्च महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगभग 1,13,810 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की है। लगातार हो रही बिकवाली से बाजार पर दबाव बढ़ा है। वहीं भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले 94.82 के स्तर तक कमजोर हो गया, जो अब तक के निचले स्तरों में गिना जा रहा है। रुपये में गिरावट से विदेशी निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट, वैश्विक निवेशकों में चिंता का माहौल
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान का निक्केई 225 करीब 3.97 प्रतिशत गिरा, जबकि टॉपिक्स इंडेक्स में लगभग 3.9 प्रतिशत की गिरावट आई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5 प्रतिशत से ज्यादा टूटा और कोस्डैक लगभग 3.97 प्रतिशत नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स भी कमजोर स्तर पर ट्रेड करता नजर आया।
अमेरिकी बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली, जहां डाउ जोंस 793.47 अंक गिरकर 45,166.64 पर बंद हुआ। S&P 500 में 1.67 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 6,368.85 पर पहुंच गया। नैस्डेक कंपोजिट 2.15 प्रतिशत गिरकर 20,948.36 पर बंद हुआ।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई
एशियाई कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड करीब 2.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 115.55 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। इससे पहले 27 मार्च को इसका स्तर 112.57 डॉलर प्रति बैरल था। 27 फरवरी के 72.48 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले इसमें करीब 59 प्रतिशत तक तेजी देखी जा चुकी है। COMEX पर भी कच्चे तेल की कीमत लगभग 2.96 प्रतिशत बढ़कर 102.59 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
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