भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को बिकवाली का ऐसा दबाव देखने को मिला, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा भड़के तनाव का सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर दिखाई दिया और कारोबार के दौरान सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक बुरी तरह फिसल गए। दोपहर 2 बजे तक बीएसई सेंसेक्स करीब 1800 अंक यानी 2.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,570 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वहीं एनएसई निफ्टी 493 अंक यानी 2.03 प्रतिशत टूटकर 23,907 पर पहुंच गया। बाजार में चौतरफा बिकवाली के कारण बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ा और निवेशकों की संपत्ति में कुछ ही घंटों के भीतर ₹8.56 लाख करोड़ की भारी कमी दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए उछाल ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट से दलाल स्ट्रीट पर बढ़ी घबराहट, चौतरफा बिकवाली ने बाजार को लाल निशान में धकेला
बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार पर शुरुआत से ही दबाव दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी। जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बिकवाली और तेज होती चली गई। दोपहर 2 बजे तक सेंसेक्स लगभग 1800 अंक गिरकर 76,570 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी 493 अंकों की कमजोरी के साथ 23,907 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। दोनों सूचकांकों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट ने बाजार में बेचैनी बढ़ा दी। बड़ी कंपनियों के साथ-साथ कई सेक्टरों में बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। बाजार की इस तेज गिरावट ने उन निवेशकों को भी सतर्क कर दिया, जो पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से तेजी की उम्मीद लगाए बैठे थे। वैश्विक तनाव के कारण बाजार में अचानक बदले माहौल ने निवेशकों की रणनीति को प्रभावित किया और मुनाफावसूली के साथ बिकवाली का दौर तेज हो गया।
कुछ ही घंटों में निवेशकों की संपत्ति ₹8.56 लाख करोड़ घटी, बाजार पूंजीकरण में आई बड़ी कमी ने बढ़ाई चिंता
शेयर बाजार की इस गिरावट का सबसे बड़ा झटका निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। मंगलवार को बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब ₹480.20 लाख करोड़ दर्ज किया गया था। बुधवार को तेज बिकवाली के बाद यह आंकड़ा घटकर लगभग ₹471.64 लाख करोड़ रह गया। यानी निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब ₹8.56 लाख करोड़ की भारी कमी आई। बाजार में आई इस गिरावट ने एक बार फिर साबित किया कि वैश्विक घटनाओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर कितनी तेजी से पड़ सकता है। सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट के कारण निवेशकों के पोर्टफोलियो की वैल्यू भी प्रभावित हुई। खासतौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी के कारण बाजार पूंजीकरण तेजी से नीचे आया। निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्रों पर है, क्योंकि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर आगे भी जारी रह सकता है।
इंटरग्लोब एविएशन से लेकर रिलायंस तक दिग्गज शेयरों में बिकवाली, कई बड़ी कंपनियों के स्टॉक 5 प्रतिशत तक फिसले
दोपहर के कारोबार में बाजार की गिरावट केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही। कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। इंटरग्लोब एविएशन, हिंदुस्तान यूनिलीवर, मारुति सुजुकी, आईटीसी, एशियन पेंट्स, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इनमें से कुछ शेयरों में गिरावट 5 प्रतिशत तक पहुंच गई। बड़ी कंपनियों के शेयरों में आई कमजोरी ने सेंसेक्स और निफ्टी पर अतिरिक्त दबाव बनाया। निवेशकों ने मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए जोखिम कम करने की कोशिश की, जिसका असर बाजार में बिकवाली के रूप में दिखाई दिया। एविएशन, ऑटो, एफएमसीजी, टेलीकॉम, बैंकिंग और ऊर्जा से जुड़े शेयरों पर दबाव ने बाजार की कमजोरी को और गहरा कर दिया। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि वैश्विक तनाव कम होता है या बिकवाली का दबाव अगले सत्र में भी बना रहता है।
अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा बढ़े तनाव ने वैश्विक बाजारों को डराया, युद्धविराम खत्म होने की खबर से बदला माहौल
भारतीय बाजार में आई गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव माना जा रहा है। बीती रात दोनों पक्षों के बीच तनाव दोबारा तेज होने और हमलों की खबरों ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ युद्धविराम समझौता खत्म होने से जुड़े बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि दोनों देशों के बीच टकराव लंबा चलता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई पर पड़ सकता है। इसी चिंता के कारण दुनिया के कई बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क दिखाई दिया। भारत भी इस वैश्विक दबाव से अछूता नहीं रहा और घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान से जुड़ी हर नई खबर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कच्चे तेल में रातों-रात 6 प्रतिशत का उछाल, ब्रेंट क्रूड 78 डॉलर पहुंचने से महंगाई और अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी तेजी से दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत रातों-रात करीब 6 प्रतिशत उछलकर 78 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। तेल की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता का विषय मानी जाती है। महंगा कच्चा तेल देश के आयात बिल को बढ़ा सकता है और रुपये पर दबाव पैदा कर सकता है। इसके अलावा परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने से महंगाई पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। यही कारण है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने शेयर बाजार के निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। फिलहाल बाजार की नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और वैश्विक निवेशकों के रुख पर बनी हुई है। यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो भारतीय शेयर बाजार में आने वाले कारोबारी सत्रों में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।





