शुद्ध नहीं तिरुपति का लड्डू….जांच समिति को मिली घी की खरीद में ये खामियां…
घी खरीद प्रक्रिया में बड़ी चूक उजागर
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के प्रसाद वाले लड्डू के लिए घी खरीद प्रक्रिया में बड़ी चूक उजागर हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, समस्या केवल मिलावट का पता न लगा पाना ही नहीं थी, बल्कि यह खरीद नियमों के बनाए जाने और उन्हें लागू करने के तरीके का नतीजा थी। सरकार द्वारा नियुक्त एक-सदस्यीय समिति ने पाया है कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) द्वारा घी खरीदने के तरीके में गंभीर खामियां थीं। समिति ने लड्डू प्रसाद बनाने में इस्तेमाल होने वाले मिलावटी घी की आपूर्ति के लिए प्रशासनिक विफलताओं और नियमों के कमजोर पालन को जिम्मेदार ठहराया है।
शिकायतों के बाद बनी जांच समिति
सेवानिवृत्त IAS अधिकारी दिनेश कुमार की अध्यक्षता में यह जांच समिति इस साल फरवरी में गठित की गई थी। यह कदम मंदिर के प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी में गैर-डेयरी पदार्थों की मौजूदगी के संकेत और लैब रिपोर्ट्स के बाद उठाया गया। समिति ने टेंडर प्रक्रिया, सप्लायर चयन और गुणवत्ता जांच की विस्तार से पड़ताल की।
नियम बनाने और लागू करने में खामी
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि समस्या केवल मिलावट पकड़ने में विफलता नहीं थी, बल्कि खरीद नियमों के निर्माण और उनके क्रियान्वयन में भी गंभीर खामियां थीं। खरीद समिति की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि उन्हीं की वजह से ऐसी परिस्थितियां बनीं, जिनमें अनियमितताएं बिना रोक-टोक जारी रहीं।
बिना पूरी समिति के लिए गए बड़े फैसले
जांच में सामने आया कि टेंडर नियमों में ढील जैसे अहम फैसले पूरी समिति की मौजूदगी के बिना ही लिए गए। इन निर्णयों में चेविरेड्डी भास्कर रेड्डी, भूमना करुणाकर रेड्डी, एम. रामुलु और मुख्य लेखा अधिकारी ओ. बालाजी जैसे सदस्य शामिल थे। वहीं, प्रोक्योरमेंट जनरल मैनेजर की अनुपस्थिति ने प्रक्रिया को और कमजोर कर दिया।
नियमों की अनदेखी और संदिग्ध बोलियां
जांचकर्ताओं ने पाया कि कई मामलों में नियमों का पालन नहीं किया गया। रिवर्स नीलामी के बाद भी बोली लगाने वालों को कीमतें कम करने की अनुमति दी गई, जो तय नियमों के खिलाफ है। बहुत कम कीमत वाली बोलियों को बिना उचित जांच के स्वीकार कर लिया गया, जिससे गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
पहले ही मिलावट की पुष्टि, फिर भी देरी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पहले की लैब रिपोर्ट्स में कुछ नमूनों में मिलावट की पुष्टि हो चुकी थी, लेकिन कार्रवाई में देरी की गई। इस लापरवाही ने मिलावटी घी के इस्तेमाल को और बढ़ावा दिया।
निगरानी में ढिलाई से बढ़ा संकट
आयोग ने स्पष्ट किया कि निगरानी की कमी और नियमों में ढिलाई के कारण ही मिलावटी घी की खरीद और उपयोग संभव हुआ। अब चंद्रबाबू नायडू सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई कर सकती है और पहले ही पिछली वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा चुकी है।
SIT जांच के बाद बढ़ी सख्ती
नायडू सरकार ने 23 जनवरी को विशेष जांच दल (SIT) द्वारा आरोप पत्र दायर किए जाने के बाद यह समिति बनाई थी। SIT, जिसे केंद्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक की निगरानी में गठित किया गया, ने एक ‘Self-Contained Note’ भी पेश किया, जिसमें कुछ अधिकारियों और समिति सदस्यों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई।
45 दिन में रिपोर्ट, अब सरकार के फैसले का इंतजार
सेवानिवृत्त IAS अधिकारी दिनेश कुमार को इस समिति का नेतृत्व सौंपा गया था, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक चूकों की जांच, टेंडर में दी गई छूट और जिम्मेदारी तय करना था। समिति को 45 दिनों में रिपोर्ट देने का समय दिया गया था। अब इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला सरकार द्वारा किया जाएगा।





