अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में युद्धविराम और शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगने के बाद सोमवार को घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार शुरू होते ही BSE Sensex और NIFTY 50 दोनों बड़ी गिरावट के साथ खुले। बाजार में घबराहट का माहौल ऐसा रहा कि कुछ ही मिनटों में निवेशकों के करीब 6 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में आई जोरदार गिरावट से बाजार में मचा हड़कंप
सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 1000 अंक से ज्यादा टूट गया। शुरुआती कारोबार में इंडेक्स 76,282 के स्तर तक फिसल गया। वहीं निफ्टी50 भी लगभग 300 अंक गिरकर 23,887 के आसपास ट्रेड करता दिखाई दिया।
विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।
रुपये में कमजोरी और क्रूड ऑयल की तेजी ने निवेशकों की चिंता और बढ़ाई
भारतीय मुद्रा में भी कमजोरी दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 94.88 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.48 पर बंद हुआ था।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 4 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली और दाम 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए। माना जा रहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो भारत जैसे बड़े आयातक देशों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
टाइटन, इंडिगो, एसबीआई और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दिया
बाजार में सबसे ज्यादा असर बड़े शेयरों पर देखने को मिला। Titan Company के शेयरों में 5 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। इसके अलावा State Bank of India, Mahindra & Mahindra, Bharti Airtel और Adani Ports and Special Economic Zone के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी कमजोरी देखने को मिली। ऑटो, रियल्टी, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई।
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजारों में भी बढ़ी बेचैनी
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बढ़ गया है। पिछले कई हफ्तों से जारी संघर्ष खत्म होने की उम्मीदों को इससे बड़ा झटका लगा है।
वैश्विक निवेशकों को डर है कि अगर हालात और बिगड़े तो तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि दुनियाभर के शेयर बाजारों में दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिन निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल बाजार पूरी तरह वैश्विक संकेतों पर निर्भर नजर आ रहा है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय सोच-समझकर फैसले लेने की सलाह दे रहे हैं। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेश और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे।





