शांगहाई सहयोग संगठन (SCO) के 2026 बिश्केक शिखर सम्मेलन से पहले, चाइना मीडिया ग्रुप
(CMG) के संवाददाता ने संगठन के महासचिव नुरलान येरमेकबायेव के साथ विशेष साक्षात्कार
किया। उन्होंने SCO की 25वीं वर्षगांठ की उपलब्धियों, भविष्य में आर्थिक और सुरक्षा सहयोग तथा
वैश्विक शासन से जुड़ी पहलों पर अपने विचार साझा किए।
येरमेकबायेव ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में SCO ने आपसी विश्वास का माहौल और समान संवाद
की व्यवस्था सफलतापूर्वक विकसित की है। इससे विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं और संस्कृतियों
वाले सदस्य देशों को जटिल मुद्दों पर आम सहमति तक पहुंचने में मदद मिली है। वर्तमान में
संगठन ने 29 विशिष्ट क्षेत्रों में सहयोग तंत्र स्थापित किए हैं और विभिन्न स्तरों की बैठकों के जरिए
ठोस सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।
उन्होंने कहा कि संगठन सदस्य देशों के आकार या आर्थिक ताकत के आधार पर कोई भेदभाव नहीं
करता, बल्कि आम सहमति के सिद्धांत का पालन करता है। यही SCO की सबसे बड़ी ताकत है।
आगामी बिश्केक शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में कई
व्यावहारिक दस्तावेज पारित किए जाएंगे, जिससे स्थायी शांति और समृद्धि के लिए SCO सदस्य
देशों के बीच सहयोग और मजबूत होगा।
आर्थिक और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में येरमेकबायेव ने बताया कि पिछले वर्ष चीन के
थ्येनचिन शहर में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में बहुपक्षीय परियोजनाओं के वित्तपोषण के
लिए SCO विकास बैंक की स्थापना का राजनीतिक निर्णय लिया गया था। इसमें बुनियादी ढांचे की
कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हरित विकास इस समय
संगठन की प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। SCO ने इन क्षेत्रों में सहयोग के लिए संबंधित रूपरेखाएं अपनाई
हैं। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा और उच्च-तकनीकी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए चीन-SCO
ऊर्जा सहयोग केंद्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुप्रयोग केंद्र की स्थापना की गई है। उन्होंने खास तौर
पर बताया कि वर्ष 2026 से SCO सदस्य देशों के बीच व्यापार 700 अरब डॉलर से अधिक हो गया
है, लेकिन बहुपक्षीय परियोजनाओं की क्षमता का अभी और अधिक इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है।
साक्षात्कार में SCO महासचिव येरमेकबायेव ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की "वैश्विक शासन
पहल" की सराहना करते हुए कहा कि यह "शांगहाई भावना" के अनुरूप है। यह पहल समानता, जन-
केंद्रित विकास, सांस्कृतिक विविधता के सम्मान और साझा विकास पर जोर देती है। उन्होंने बताया
कि पिछले वर्ष थ्येनचिन शिखर सम्मेलन में इस पहल का प्रस्ताव सही समय पर रखा गया था।
SCO सदस्य देशों ने ब्रिक्स और अन्य तंत्रों के साथ सहयोग करने के लिए अपना समर्थन और
तत्परता भी जताई है। इसका उद्देश्य अधिक न्यायसंगत और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को
बढ़ावा देना है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)