महंगी कोचिंग और इंटरनेट के बढ़ते खर्च के बीच पीएम ई-विद्या की पहल उन विद्यार्थियों के लिए बड़ा विकल्प बनकर सामने आ रही है, जो संसाधनों की कमी के कारण अतिरिक्त पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए हर विद्यार्थी के पास स्मार्टफोन या तेज इंटरनेट होना जरूरी नहीं है। डीडी फ्री डिश पर उपलब्ध पीएम ई-विद्या के डीटीएच चैनलों के जरिए बिना इंटरनेट खर्च के पढ़ाई की जा सकती है।
कक्षा 1 से 12 तक पढ़ाई, वो भी मुफ्त
उत्तर प्रदेश में पीएम ई-विद्या के लिए पांच डीटीएच चैनल निर्धारित किए गए हैं। इन्हें कक्षा के हिसाब से बांटा गया है।
- चैनल 173 — बाल वाटिका से कक्षा 2 तक
- चैनल 174 — कक्षा 3 से 5 तक
- चैनल 175 — कक्षा 6 से 8 तक
- चैनल 176 — कक्षा 9 से 10 तक
- चैनल 177 — कक्षा 11 से 12 तक
इन चैनलों पर एससीईआरटी की तैयार शैक्षणिक सामग्री का प्रसारण 24 घंटे और सातों दिन किया जा रहा है। यानी छात्र स्कूल में पढ़े पाठ को घर लौटने के बाद भी दोहरा सकते हैं।
विज्ञान की पढ़ाई कोचिंग से निकलकर घर तक
मेरठ की राजकीय कन्या इंटर कॉलेज किठौर की विज्ञान शिक्षिका रुचिरा चंदेल का चयन इस पहल के लिए हुआ है। लखनऊ में प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल कंटेंट, शैक्षणिक वीडियो, स्टूडियो प्रस्तुतीकरण और डिजिटल माध्यम से पढ़ाने की रणनीतियों पर प्रशिक्षण दिया गया।
यहीं से इस योजना का एक बड़ा पहलू सामने आता है। डिजिटल शिक्षा का मतलब सिर्फ मोबाइल और इंटरनेट नहीं है। टीवी को माध्यम बनाकर सरकार उन परिवारों तक भी शैक्षणिक सामग्री पहुंचाने की कोशिश कर रही है, जहां स्मार्टफोन, महंगा डेटा या ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीण छात्रों के लिए बदल सकती है पढ़ाई की तस्वीर
शहरों में जहां विद्यार्थी अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कोचिंग संस्थानों तक आसानी से पहुंच बना लेते हैं, वहीं ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में यह सुविधा हर बच्चे को नहीं मिलती। ऐसे में डीडी फ्री डिश के जरिए उपलब्ध शैक्षणिक सामग्री उस अंतर को कम करने का माध्यम बन सकती है।
खासकर कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान और दूसरे कठिन विषयों का दोहराव बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर वही पाठ टीवी पर दोबारा उपलब्ध हो, तो विद्यार्थी अपनी गति से विषय को समझ सकता है।
टीवी से मोबाइल और फिर डिजिटल पढ़ाई का कनेक्शन
पीएम ई-विद्या की खासियत केवल टीवी प्रसारण तक सीमित नहीं है। विद्यार्थी कार्यक्रमों को पीएम ई-विद्या के यूट्यूब चैनल और मोबाइल एप के माध्यम से भी देख सकते हैं। टीवी स्क्रीन पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके विद्यार्थी दीक्षा पोर्टल और संबंधित डिजिटल सामग्री तक पहुंच सकते हैं।
यानी मॉडल कुछ ऐसा है—टीवी से शुरुआत, क्यूआर कोड से डिजिटल प्लेटफॉर्म और वहां से अतिरिक्त अध्ययन।
शिक्षक की भूमिका भी बदल रही है
इस मॉडल में शिक्षक सिर्फ कक्षा में पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि डिजिटल शिक्षा का मार्गदर्शक भी बन रहा है। रुचिरा चंदेल की योजना में स्कूलों में ‘क्यूआर स्कैन आवर’, अभिभावकों को दीक्षा एप की जानकारी देना और टीवी पर चैनलों की सेटिंग में मदद करना शामिल है।
इसके अलावा प्रत्येक कक्षा में दो विद्यार्थियों को ‘डिजिटल मॉनिटर’ बनाने का विचार भी है, ताकि वे अपने साथियों को डिजिटल कक्षाओं और ऑनलाइन सामग्री के इस्तेमाल में सहायता कर सकें।
कोचिंग खत्म नहीं, लेकिन निर्भरता कम करने की कोशिश
इसे सीधे-सीधे यह कहना कि अब कोचिंग की जरूरत ही नहीं रहेगी, सही नहीं होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च स्तर की तैयारी के लिए विद्यार्थियों की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। लेकिन स्कूली शिक्षा, पाठ की पुनरावृत्ति और बुनियादी अवधारणाओं को मजबूत करने में ऐसी मुफ्त सामग्री कोचिंग पर निर्भरता कम करने का विकल्प जरूर दे सकती है। सबसे बड़ा बदलाव यही है कि पढ़ाई का रास्ता अब सिर्फ स्कूल से कोचिंग और कोचिंग से घर तक सीमित नहीं है। टीवी स्क्रीन भी क्लासरूम बन सकती है। और अगर इंटरनेट नहीं है, तब भी पढ़ाई रुकने की जरूरत नहीं।





