सऊदी मौलानाओं की मौजूदगी, मेहमानों के लिए 60 हजार बिरयानी पैकेट: मुर्शिदाबाद के ‘बाबरी मस्जिद’ जैसे कार्यक्रम की पूरी अंदरूनी कहानी
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले में निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा आयोजित ‘बाबरी मस्जिद शैली’ की मस्जिद के शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर पूरे क्षेत्र में राजनीतिक हलचल और सुरक्षा व्यवस्था चरम पर है। यह आयोजन शनिवार को किया जा रहा है, जिसके लिए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं।
क्यों बवाल?
टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर आज 6 दिसंबर के दिन — जिसे देश में बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के रूप में जाना जाता है — ‘बाबरी मस्जिद जैसी’ संरचना वाली नई मस्जिद का शिलान्यास कर रहे हैं उनके इस बयान ने तुही राजनीतिक आग भड़का दी थी। टीएमसी ने इसे धार्मिक और राजनीतिक संवेदनशीलता से खिलवाड़ बताते हुए गुरुवार को कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि “धर्म के नाम पर राजनीति की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
कबीर का दावा: तीन लाख लोग होंगे एकत्र
कार्यक्रम के आयोजकों और विधायक कबीर के करीबी सहयोगियों के अनुसार, करीब 25 बीघा जमीन पर लगभग 3 लाख लोगों के एकत्र होने की संभावना जताई गई है। विधायक का दावा है कि दो सऊदी मौलाना भी इस कार्यक्रम में विशेष काफिले से कोलकाता एयरपोर्ट से सीधे मुर्शिदाबाद पहुंचेंगे।
कार्यक्रम में सुबह 10 बजे क़ुरआन पाठ से शुरुआत होगी, और मुख्य शिलान्यास दोपहर 12 बजे किया जाएगा। कबीर का कहना है कि यह कार्यक्रम “पूरी तरह धार्मिक है, इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं।” हालांकि टीएमसी और विपक्ष दोनों ने इसे चुनावी साल में एक “संवेदनशील मुद्दे को हवा देने की कोशिश” बताया।
60 हजार बिरयानी पैकेट की तैयारी
कबीर के करीबी सूत्रों के अनुसार, इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए भोजन की भारी व्यवस्था की गई है। करीब 40,000 बिरयानी पैकेट मेहमानों और दूर से आए लोगों के लिए तैयार किए जा रहे हैं। 20,000 अतिरिक्त पैकेट स्थानीय निवासियों और स्वयंसेवकों को बांटे जाएंगे। मुर्शिदाबाद के कई प्रमुख कैटरिंग सर्विस प्रदाताओं को एक साथ मिलकर यह जिम्मेदारी दी गई है। बताया जाता है कि सिर्फ बिरयानी पैकेट्स के लिए ही 300 से अधिक कुक और हेल्पर लगातार काम कर रहे हैं। दोपहर 2 बजे सामूहिक भोजन (कम्युनिटी लंच) का आयोजन होगा, जिसके तुरंत बाद सभी लोगों को मैदान खाली करने का निर्देश है। पुलिस ने आयोजकों को शाम 4 बजे तक पूरा स्थल खाली करने के आदेश दिए हैं।
सऊदी मौलानाओं की विशेष मौजूदगी
कार्यक्रम में दो सऊदी अरब के मौलानाओं के शामिल होने की बात ने इसे और अधिक सुर्खियों में ला दिया है। आयोजक समिति के अनुसार मौलाना शनिवार सुबह 8 बजे कोलकाता से विशेष सुरक्षा काफिले में कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। दोनों मौलाना मुख्य समारोह में शिलान्यास के समय मौजूद रहेंगे। यह पहली बार है जब मुर्शिदाबाद में किसी स्थानीय धार्मिक कार्यक्रम में विदेशी मौलाना औपचारिक रूप से शामिल हो रहे हैं। इससे प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर और सतर्कता बढ़ा दी है।
सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त
ऐसे संवेदनशील आयोजन में किसी भी संभावित तनाव को रोकने के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात किया है।
3,500 से अधिक पुलिसकर्मी मुर्शिदाबाद के बेलडांगा और रानीनगर थाना क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-12 (NH-12) पर बैरिकेडिंग और चेकिंग पॉइंट बनाए गए हैं। भीड़ नियंत्रण के लिए ड्रोन कैमरे और क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) की भी तैनाती की गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और नियंत्रित ढंग से संपन्न हो, इसके लिए कठोर निगरानी की जा रही है।
हाई कोर्ट का कड़ा निर्देश
कार्यक्रम को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि
किसी भी प्रकार की साम्प्रदायिक तनाव या अव्यवस्था को रोकने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जाएं। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था सख्ती से बनाए रखी जाए और स्थानीय समुदाय को सुरक्षा का भरोसा दिया जाए। कार्यक्रम के प्रति बढ़ती भीड़, राजनीतिक संवेदनशीलता और संभावित विवाद को देखते हुए कोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन और ज्यादा सक्रिय हो गया है।
क्या कह रही है राजनीति?
टीएमसी जहां इसे “धर्म के नाम पर राजनीतिक एजेंडा” बता रही है, वहीं विधायक कबीर ने आरोप लगाया है कि उन्हें “असली मुद्दों पर आवाज़ उठाने” की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। वहीं बीजेपी ने इस कार्यक्रम को लेकर टीएमसी पर “दोहरी राजनीति” का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने कहा कि यह आयोजन प्रदेश में “अनावश्यक सांप्रदायिक ध्रुवीकरण” की कोशिश है।
मुर्शिदाबाद का यह कार्यक्रम, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मेहमान, बड़े पैमाने पर भीड़, और विवादित धार्मिक संदर्भ शामिल हैं, राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है। प्रशासन, हाई कोर्ट और राजनीतिक दलों के दबाव के बीच यह आयोजन कितना शांतिपूर्वक संपन्न होगा, यह देखने वाली बात होगी।




