Satna और Chhatarpur के बीच इन दिनों एक ऐसी प्रेम कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसने समाज के सामने रिश्तों और भरोसे की नई मिसाल पेश की है। केंद्रीय जेल सतना में पदस्थ सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा खातून ने उम्रकैद की सजा पूरी कर चुके धर्मेंद्र सिंह के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर सबको चौंका दिया। दोनों की शादी 5 मई को लवकुशनगर में संपन्न हुई, जहां वैदिक मंत्रों और पारंपरिक रस्मों के बीच दोनों ने सात फेरे लिए।
जेल की चारदीवारी के भीतर शुरू हुई पहचान धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई
बताया जा रहा है कि फिरोजा खातून की पोस्टिंग उस समय सतना केंद्रीय जेल में थी, जब धर्मेंद्र सिंह हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। जेल प्रशासन में वारंट शाखा की जिम्मेदारी संभाल रहीं फिरोजा और जेल के कामकाज में सहयोग कर रहे धर्मेंद्र के बीच बातचीत शुरू हुई।
धीरे-धीरे यह परिचय दोस्ती में बदल गया और समय के साथ दोनों एक-दूसरे के करीब आते चले गए। जेल परिसर में शुरू हुई यह कहानी आगे चलकर जीवनसाथी बनने के फैसले तक पहुंच गई।
साल 2022 में रिहाई के बाद भी दोनों का संपर्क लगातार बना रहा
धर्मेंद्र सिंह को अच्छे व्यवहार के आधार पर वर्ष 2022 में जेल से रिहा कर दिया गया था। जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों के बीच बातचीत और मुलाकातों का सिलसिला जारी रहा। फोन पर लंबी बातचीत और एक-दूसरे के प्रति भरोसे ने उनके रिश्ते को और मजबूत बना दिया।
करीब चार साल तक एक-दूसरे को समझने के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। परिवार और समाज की प्रतिक्रियाओं को जानते हुए भी उन्होंने अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया।
परिवार के विरोध के बीच बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने निभाई शादी की रस्में
यह विवाह जितना अलग था, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी साबित हुआ। मुस्लिम परिवार से आने वाली फिरोजा खातून के परिजन इस फैसले से सहमत नहीं थे और उन्होंने शादी समारोह से दूरी बना ली।
ऐसे में शादी के दौरान एक अलग सामाजिक तस्वीर देखने को मिली। समारोह में मौजूद बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने पिता और भाई की भूमिका निभाते हुए कन्यादान की रस्म पूरी कराई। हिंदू परंपराओं के अनुसार संपन्न हुई इस शादी ने मौके पर मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
सतना से छतरपुर तक इस अनोखी शादी की चर्चा लगातार तेज हो गई
वर्तमान में सतना जेल में उप-जेलर के रूप में सेवाएं दे रहीं फिरोजा खातून के फैसले की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है। कई लोग इसे सामाजिक सौहार्द और व्यक्तिगत विश्वास की मिसाल बता रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों ने तमाम सामाजिक दबावों के बावजूद अपने रिश्ते को सम्मान के साथ स्वीकार किया। यही वजह है कि यह शादी अब सतना और छतरपुर में “गंगा-जमुनी” मेलजोल की मिसाल के तौर पर देखी जा रही है।
प्यार, भरोसा और सामाजिक संदेश की वजह से चर्चा में आई यह अनोखी कहानी
यह कहानी सिर्फ दो लोगों की शादी भर नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे सामाजिक सीमाओं से आगे बढ़कर लिए गए फैसले के रूप में भी देखा जा रहा है। जहां एक ओर यह रिश्ता लोगों को हैरान कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई लोग इसे इंसानियत, भरोसे और आपसी सम्मान का उदाहरण भी बता रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस शादी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग इस अनोखे रिश्ते पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि सतना की यह शादी अब लंबे समय तक चर्चा में रहने वाली है।





