भारत की मुद्रा बाजार में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अब तक के सबसे कमजोर स्तर के करीब पहुंच गया है। 19 मई 2026 को शुरुआती कारोबार में रुपया 2 पैसे टूटकर 96.37 प्रति डॉलर पर खुला। यह लगातार आठवां कारोबारी सत्र है जब रुपये में गिरावट दर्ज की गई है। विदेशी बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भारतीय मुद्रा पर दबाव और बढ़ा दिया है।
कच्चे तेल की महंगाई और खाड़ी संकट ने रुपये की हालत बिगाड़ी
मुद्रा बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई में बाधा ने आयात लागत बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये पर दिखाई दे रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में बढ़ा दबाव
रुपये में कमजोरी की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी मानी जा रही है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण निवेशक सुरक्षित बाजारों की तरफ रुख कर रहे हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार और मुद्रा दोनों पर दिखाई दे रहा है। बाजार जानकारों का कहना है कि फिलहाल डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है।
लगातार आठ दिन की गिरावट ने बढ़ाई आयात और महंगाई की चिंता
रुपये की गिरावट का असर अब आम लोगों पर भी पड़ सकता है। अगर डॉलर लगातार मजबूत रहा तो पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और आयातित सामान महंगे हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची रहीं, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है।
2026 में रुपये की गिरावट का पूरा रिकॉर्ड यहां देखें
| तारीख | 1 डॉलर की कीमत | बाजार पर असर |
|---|---|---|
| 8 मई 2026 | ₹94.42 | खाड़ी तनाव के बाद गिरावट शुरू |
| 11 मई 2026 | ₹95.39 | पहली बार ₹95 के पार |
| 12 मई 2026 | ₹95.63 | अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर |
| 13 मई 2026 | ₹95.70 | विदेशी बिकवाली से दबाव |
| 14 मई 2026 | ₹95.71 | वैश्विक बाजार में अनिश्चितता |
| 15 मई 2026 | ₹95.99 | क्रूड 110 डॉलर के पार |
| 18 मई 2026 | ₹96.27 | होर्मुज तनाव से कमजोरी |
| 19 मई 2026 | ₹96.37 | अब तक का सबसे निचला स्तर |
क्या आगे और टूट सकता है रुपया?
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि जब तक वैश्विक बाजार में स्थिरता नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं दिखती, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक की निगरानी और विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति को संभालने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल निवेशकों और कारोबारियों की नजर डॉलर इंडेक्स और क्रूड ऑयल की चाल पर टिकी हुई है।





