देश में पिछले दिनों Gen Z के आंदोलन के बाद से कई तरह के परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। इस आंदोलन की तुलना अन्ना हजारे के आंदोलन से भी की जा रही थी लेकिन आंदोलन की अगुवाई कर रहे अभिजित दीपके ने इसके राजनैतिक होने से साफ इंकार कर दिया। पहले आंदोलन की सफलता के बाद अब Gen Z ने सरकारी स्कूलों में जाकर उनका जायजा लेने का ऐलान किया है। Gen Z के नए नए प्लानिंग को देखते हुए अब राजनीतिक दल भी अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
Gen-Z को लेकर सरकार का नया आदेश
Gen-Z के पहले आंदोलन के बाद केन्द्रीय मंत्री पद से धर्मेद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया इसके बाद से Gen-Z और Gen Alpha हर राज्य में सड़कों पर आंदोलन करती नजर आ रही हैं। कहीं स्कूल बिल्डिंग की समस्या पर तो कहीं स्कूल बसों की बढ़ती फीस की समस्या पर ऐसे में अब केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ‘एक दिन, एक विश्वविद्यालय’ (One Day, One University) कार्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया है । इसके तरह रोज एक केंद्रीय मंत्री यूनिवर्सिटी में जाकर छात्रों से सीधा संवाद करेंगे। उनकी बातें सुनेगें और साथ ही उनको सरकार की योजनाओं से भी अवगत कराऐगें।
Gen-Z के लिए कांग्रेस के शुरू किया ‘छात्रों की गूंज’
Gen Z के आंदोलन को कांग्रेस ने जंतर मंतर पर साथ नहीं दिया। लेकिन उसके बाद से कांग्रेस पार्टी ने अलग से कार्यक्रम शुरू किया। ‘छात्रों की गूंज’ इस कार्यक्रम को कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी ने शुरू किया और अब इसको और व्यापक कर रहे है। 22 अगस्त को ये कार्यक्रम महाराष्ट्र के पुणे में होने वाला है।
Gen-Z की बड़ी आबादी
Gen Z देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं। देश की 27 प्रतिशत जनसंख्या Gen Z है। ऐसे में आने वाले समय में ये देश के चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए राजनैतिक दल Gen Z में देश के युवा और भविष्य तो देख रहे हैं इसके साथ वोट बैंक के मजर से भी देख रहे हैं।





