सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण: आत्मनिर्भरता की बुनियाद
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 35% आरक्षण देने की नीति लागू की है। यह फैसला ना केवल रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से भी सशक्त बना रहा है। वर्ष 2006 से शुरू हुए इस अभियान का परिणाम है कि आज बिहार की महिलाएं प्रशासनिक पदों से लेकर शिक्षण, पुलिस और चिकित्सा सेवाओं में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
पंचायतों में नेतृत्व संभाल रहीं महिलाएं
बिहार में महिलाओं की भागीदारी केवल नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषदों में भी महिलाएं नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं। आज राज्य की 50% से अधिक पंचायतों की कमान महिलाओं के हाथ में है। इसके अतिरिक्त, बिहार में 29 आदर्श महिला हितैषी पंचायतों का संचालन पूरी तरह से महिलाओं के हाथ में सौंपा गया है। यह एक सामाजिक क्रांति की शुरुआत है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में भी लैंगिक समानता की मिसाल बन रही है।
जीविका’ बनी आर्थिक स्वतंत्रता की राह
वर्ष 2007 में शुरू हुई ‘जीविका परियोजना’ बिहार में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का स्तंभ बन चुकी है। इस योजना के तहत 1.35 करोड़ से अधिक परिवारों को जोड़ा जा चुका है।
महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाए जाते हैं, जिन्हें वित्तीय सेवाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। ‘जीविका दीदियां’ आज नर्सरी, सोलर शॉप, स्वास्थ्य सेवा, जन औषधि केंद्र, रसोई और पोषण आहार जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनकर पूरे समाज को प्रेरणा दे रही हैं। अब तक 10 लाख से अधिक महिलाएं स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षित हो चुकी हैं और 45 स्वास्थ्य सहायता केंद्रों का संचालन कर रही हैं।
महिलाएं अब ड्राइविंग सीट पर भी
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में महिलाएं अब सड़कों पर आत्मविश्वास के साथ वाहन चला रही हैं। पिछले 8 वर्षों में अकेले पटना की करीब 29 हजार ेस अधिक महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किया है। मुजफ्फरपुर की 18,560 महिलाएं ड्राइविंग लाइसेंस धारक बनीं। तिरहुत प्रमंडल में 33,000 से अधिक महिलाएं ड्राइविंग की दिशा में आगे आईं। महिलाओं की यह भागीदारी उन्हें ना केवल सामाजिक स्वतंत्रता देती है, बल्कि सुरक्षित आवागमन और रोजगार की दिशा में भी नई संभावनाएं खोलती है।
देश में सबसे अधिक महिला पुलिस: बिहार बना आदर्श
बिहार एकमात्र राज्य है जहां महिला पुलिसकर्मियों की संख्या सबसे अधिक है — लगभग 36,000 महिला पुलिस, जो राज्य की कुल पुलिस बल का 35% से भी अधिक है। यह संभव हुआ नीतीश सरकार की उस दूरदर्शी सोच से, जिसने महिलाओं को सुरक्षा बलों में बराबर का अवसर देने की नीति अपनाई। आज बिहार की बेटियां कांस्टेबल से लेकर एसपी और डीएसपी तक के पदों पर अपनी जिम्मेदारियों को साहस और निष्ठा से निभा रही हैं।
नारी शक्ति का बिहार मॉडल
बिहार सरकार का यह महिला सशक्तीकरण मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है। सरकारी आरक्षण से लेकर पंचायत नेतृत्व, जीविका योजना से लेकर पुलिस और परिवहन तक — हर क्षेत्र में महिलाएं अब सशक्त, स्वावलंबी और नेतृत्वकारी भूमिका में हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों ने साबित कर दिया है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो, तो महिलाओं को सिर्फ बराबरी का हक ही नहीं, नेतृत्व का मंच भी दिया जा सकता है। बिहार की बेटियां आज खुद पर भरोसा कर रहीं हैं, और अपने आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में पूरे आत्मविश्वास से कदम बढ़ा रही हैं। …(प्रकाश कुमार पांडेय)




