महंगाई में हल्की बढ़त…हरी सब्जियां महंगी….लेकिन प्याज-लहसुन सस्ते
खुदरा महंगाई दर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई मार्च में 3.40% रही, जो फरवरी के 3.21% से थोड़ी ज्यादा है। हालांकि यह बढ़ोतरी मामूली है और अब भी नियंत्रण में मानी जा रही है।
हरी सब्जियों ने बढ़ाया खर्च
हरी सब्जियों के दामों में तेजी देखने को मिली है, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट थोड़ा बढ़ा है। टमाटर, हरी मिर्च और पत्तेदार सब्जियों के महंगे होने से खाने-पीने की लागत पर असर पड़ा है। मौसम और सप्लाई की अनिश्चितता को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
प्याज-लहसुन ने दी राहत
एक तरफ जहां हरी सब्जियां महंगी हुईं, वहीं दूसरी ओर प्याज, आलू और लहसुन की कीमतों में गिरावट आई है। इन जरूरी खाद्य पदार्थों के सस्ते होने से उपभोक्ताओं को कुछ राहत जरूर मिली है। यही कारण है कि कुल मिलाकर महंगाई का असर बहुत ज्यादा भारी नहीं पड़ा।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर
वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट में जारी जियो-पॉलिटिकल तनाव का असर भी सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट में बाधा के कारण तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर आने वाले समय में महंगाई पर और पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
RBI के लक्ष्य से नीचे महंगाई
राहत की बात यह है कि मौजूदा महंगाई दर अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक के 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। इसका मतलब है कि फिलहाल महंगाई नियंत्रण में है और अर्थव्यवस्था पर इसका दबाव सीमित है।
आम आदमी के लिए क्या मतलब?
महंगाई में हल्की बढ़ोतरी के बावजूद आम आदमी के लिए स्थिति ज्यादा चिंताजनक नहीं है। रोजमर्रा की कुछ चीजें महंगी जरूर हुई हैं, लेकिन कई जरूरी खाद्य पदार्थ सस्ते होने से संतुलन बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात ज्यादा नहीं बिगड़े, तो आने वाले महीनों में महंगाई स्थिर रह सकती है।
आगे कैसी रहेगी तस्वीर?
फिलहाल महंगाई की चाल संतुलित नजर आ रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात और मौसम की स्थिति आगे की दिशा तय करेंगे। सरकार और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर भी नजर बनी रहेगी, ताकि महंगाई को काबू में रखा जा सके और आम लोगों को राहत मिलती रहे।