रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई का जरिया सीमित हो जाता है, इसलिए नौकरी या कारोबार के दौरान ही भविष्य के लिए पर्याप्त फंड तैयार करना जरूरी है। आज के समय में लोग रिटायरमेंट की तैयारी काफी पहले शुरू कर देते हैं, लेकिन केवल बचत करना ही पर्याप्त नहीं है। सही लक्ष्य तय करना, महंगाई को ध्यान में रखना, स्वास्थ्य खर्च के लिए तैयारी करना और निवेश को अलग-अलग विकल्पों में बांटना भी जरूरी है। अगर इन पहलुओं को नजरअंदाज किया गया तो लंबे समय तक बनाई गई वित्तीय योजना कमजोर पड़ सकती है। रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय इन पांच गलतियों से बचना बेहद जरूरी है।
रिटायरमेंट के बाद कैसी जिंदगी चाहिए, इसका अनुमान पहले से जरूर लगाएं
रिटायरमेंट प्लान बनाने से पहले यह समझना जरूरी है कि नौकरी खत्म होने के बाद आप किस तरह की जीवनशैली रखना चाहते हैं। घर के खर्च, घूमना-फिरना, शौक और रोजमर्रा की जरूरतों के हिसाब से भविष्य के खर्च का अनुमान लगाया जा सकता है। अगर रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों का कोई स्पष्ट अंदाजा नहीं होगा तो जमा किया गया फंड कम पड़ सकता है।
महंगाई और आर्थिक उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज करना भविष्य में भारी पड़ सकता है
आज किसी वस्तु की कीमत जितनी है, जरूरी नहीं कि कई साल बाद भी उतनी ही रहे। उदाहरण के तौर पर ₹50 की वस्तु 7 फीसदी सालाना महंगाई दर से 30 साल बाद करीब ₹381 की हो सकती है। इसलिए रिटायरमेंट फंड बनाते समय भविष्य की महंगाई को गणना में शामिल करना जरूरी है। साथ ही आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव से निपटने के लिए पर्याप्त बचत और निवेश रखना भी जरूरी है।
रिटायरमेंट फंड के साथ हेल्थ इंश्योरेंस को भी योजना में शामिल करें
उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं। ऐसे में केवल रिटायरमेंट कॉर्पस पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं हो सकती। पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस या स्वास्थ्य कवरेज रखने से अचानक आने वाले बड़े मेडिकल खर्चों का आर्थिक असर कम किया जा सकता है। इसलिए रिटायरमेंट की तैयारी में स्वास्थ्य सुरक्षा को भी जगह देना जरूरी है।
पूरा पैसा एक ही निवेश विकल्प में लगाने से जोखिम बढ़ सकता है
अगर आपकी बचत शेयर, म्यूचुअल फंड या किसी दूसरे निवेश विकल्प में है तो पूरे पैसे को एक ही जगह रखने से बचना चाहिए। डायवर्सिफिकेशन यानी अलग-अलग निवेश विकल्पों में पैसा बांटने से किसी एक निवेश के खराब प्रदर्शन का पूरा असर पोर्टफोलियो पर नहीं पड़ता। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर यह बात और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उस समय पूंजी की सुरक्षा भी जरूरी होती है।
कम उम्र से बचत शुरू न करना रिटायरमेंट फंड को कमजोर कर सकता है
रिटायरमेंट के लिए बचत जितनी जल्दी शुरू की जाए, उतने लंबे समय तक पैसा निवेश में रह सकता है। इसके विपरीत अगर बचत बहुत देर से या बहुत कम राशि से शुरू की जाती है तो लक्ष्य पूरा करने के लिए बाद में ज्यादा रकम लगानी पड़ सकती है। इसलिए नियमित और समय पर बचत शुरू करना रिटायरमेंट प्लानिंग का अहम हिस्सा है।





