रिलायंस के शेयरों में 26% की गिरावट, क्या मुकेश अंबानी के कारोबार पर बढ़ा दबाव? नतीजों से तय होगी आगे की दिशा

Reliance shares fall 26 pratishat

2026 में निफ्टी से भी ज्यादा टूटा रिलायंस का शेयर | रिफाइनिंग कारोबार, जियो और रिटेल पर निवेशकों की नजर | 1,130 रुपये का स्तर बना अहम सहारा, 1,234 के पार निकलने पर वापसी की उम्मीद

भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में वर्ष 2026 के दौरान आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। जिस कंपनी को लंबे समय तक भारतीय शेयर बाजार की सबसे मजबूत कंपनियों में गिना जाता रहा, उसका शेयर इस साल करीब 26 प्रतिशत टूट चुका है। दूसरी तरफ निफ्टी 50 में गिरावट 12 प्रतिशत से कुछ अधिक रही है। यानी रिलायंस का प्रदर्शन व्यापक बाजार के मुकाबले कहीं कमजोर रहा है।

अब 30 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों की घोषणा के साथ बाजार की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कंपनी अपने पुराने कारोबार यानी तेल शोधन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की मजबूती से मुनाफे को सहारा दे पाएगी? या फिर निवेशकों को जियो और रिलायंस रिटेल के कारोबार से ही भविष्य की उम्मीद लगानी होगी? यह सिर्फ एक कंपनी के तिमाही नतीजों का मामला नहीं है, बल्कि रिलायंस के बदलते कारोबारी स्वरूप और निवेशकों के भरोसे की भी परीक्षा है।

1. शेयर में 26% की गिरावट, बाजार से पिछड़ी रिलायंस

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में इस साल लगातार दबाव देखने को मिला है। 2026 में अब तक शेयर करीब 26 प्रतिशत गिर चुका है, जबकि निफ्टी 50 में गिरावट 12 प्रतिशत से अधिक रही है। यह अंतर बताता है कि रिलायंस को लेकर निवेशकों की चिंताएं केवल बाजार की सामान्य कमजोरी तक सीमित नहीं हैं। गुरुवार के कारोबार में कंपनी का शेयर करीब एक प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,167 रुपये पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,158 रुपये पर था। हालांकि एक दिन की तेजी से पूरे साल का रुख नहीं बदलता। निवेशक अब यह जानना चाहते हैं कि कंपनी के अलग-अलग कारोबार में मुनाफे की स्थिति कैसी है और आने वाले महीनों में विकास की रफ्तार कहां से आएगी।

2. पुराने कारोबार पर टिकी उम्मीद, रिफाइनिंग बनेगी ताकत?

रिलायंस के कारोबार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अब भी तेल, गैस, रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र से जुड़ा है। सितंबर तिमाही के नतीजों से पहले बाजार में उम्मीद है कि रिफाइनिंग कारोबार में सुधार कंपनी की कमाई को मजबूती दे सकता है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें, तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की मांग और रिफाइनिंग मार्जिन इस कारोबार की कमाई तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। रिलायंस के सामने चुनौती यह है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार बदलाव हो रहे हैं। पश्चिम एशिया का तनाव, तेल आपूर्ति की अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय मांग में उतार-चढ़ाव कारोबार को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में अगर रिफाइनिंग कारोबार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करता है तो कंपनी के नतीजों को सहारा मिल सकता है। यही वजह है कि इस तिमाही में निवेशकों की नजर सबसे पहले पुराने ऊर्जा कारोबार पर है।

3. जियो और रिटेल से भविष्य की उम्मीद

रिलायंस की रणनीति केवल तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार पर निर्भर रहने की नहीं है। कंपनी पिछले कुछ वर्षों में दूरसंचार, डिजिटल सेवाओं और खुदरा कारोबार में अपनी मजबूत मौजूदगी बना चुकी है। जियो प्लेटफॉर्म्स कंपनी के भविष्य के विकास का बड़ा आधार है। जियो के संभावित सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ की चर्चा ने भी रिलायंस के शेयर में खरीदारी की दिलचस्पी बढ़ाई है। लेकिन बाजार में उत्साह के बावजूद शेयर 1,200 रुपये के स्तर के ऊपर टिकने में सफल नहीं रहा। इससे पता चलता है कि निवेशक केवल भविष्य की संभावनाओं के आधार पर शेयर को ऊंचे स्तर पर खरीदने के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं रिलायंस रिटेल के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। खुदरा कारोबार में बिक्री, उपभोक्ता मांग, परिचालन लागत और लाभ की स्थिति कंपनी की कुल कमाई को प्रभावित कर सकती है। इसलिए रिलायंस के लिए असली चुनौती यह है कि पुराने कारोबार से नकदी और मुनाफा आता रहे, जबकि नए कारोबार भविष्य की विकास दर को मजबूत करें।

4. तकनीकी संकेत क्या बता रहे हैं?

शेयर बाजार के तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक रिलायंस का शेयर इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य बाजार रणनीतिकार आनंद जेम्स के अनुसार, रिलायंस का शेयर पूरे साल गिरावट के रुख में रहा है और अभी तक तेजी की दिशा में स्पष्ट बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं। उनके मुताबिक 1,234 रुपये के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण है। शेयर इस स्तर तक उछाल दिखाने के बाद फिर से व्यापक गिरावट के रुख में लौट सकता है। ऐसी स्थिति में 1,040 रुपये तक गिरावट की आशंका भी जताई गई है।

हालांकि 1,234 रुपये के ऊपर मजबूती से कारोबार या 1,152 रुपये के ऊपर लगातार टिके रहने को निचले स्तर पर मजबूती बनने का संकेत माना जा सकता है। एलकेपी सिक्योरिटीज के तकनीकी विश्लेषक वत्सल भुवा के अनुसार, जियो के आईपीओ की चर्चा से शेयर में निचले स्तरों पर खरीदारी आई, लेकिन 1,200 रुपये के ऊपर टिकने में नाकामी ने ऊंचे स्तरों पर बिकवाली का दबाव दिखाया। उनके मुताबिक 1,130 रुपये महत्वपूर्ण मांग क्षेत्र है, जबकि 1,230 रुपये के ऊपर बंद भाव मिलने पर निचले स्तर पर मजबूती बनने की संभावना की पुष्टि हो सकती है।

5. 1,130 रुपये का सहारा, 1,300 तक पहुंचने की संभावना?

चॉइस ब्रोकिंग के तकनीकी शोध विश्लेषक हितेश टेलर के मुताबिक, रिलायंस के शेयर में तकनीकी संकेतक कमजोर स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं। साप्ताहिक आधार पर आरएसआई 35.12 पर है। यह बताता है कि शेयर में बिकवाली का दबाव काफी बढ़ चुका है और इसमें सुधार की संभावना बन सकती है। शेयर अपने महत्वपूर्ण औसत स्तरों से नीचे कारोबार कर रहा है। टेलर के अनुसार, 1,100 से 1,200 रुपये का दायरा निकट अवधि में महत्वपूर्ण सहारा क्षेत्र है। अगर शेयर में लगातार तेजी आती है तो 1,280 से 1,300 रुपये के बीच अगली बड़ी बाधा सामने आ सकती है। इस तरह तकनीकी विश्लेषण में तीन महत्वपूर्ण स्तर सामने आते हैं।

हालांकि 1,040 रुपये का स्तर भी नकारात्मक परिस्थिति में संभावित गिरावट के लक्ष्य के तौर पर सामने आया है।

6. नतीजों के दिन निवेशकों की अग्निपरीक्षा

पिछले पांच तिमाही नतीजों के बाद रिलायंस के शेयर की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। तीन बार शेयर में गिरावट आई, जबकि दो बार तेजी दर्ज की गई। 17 जुलाई 2026 को नतीजों के बाद शेयर में 2.59 प्रतिशत की सबसे बड़ी तेजी आई थी। इसके उलट 24 अप्रैल 2026 को इसमें 1.15 प्रतिशत की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई। इससे साफ है कि रिलायंस के शेयर में केवल नतीजों की घोषणा ही तेजी या गिरावट तय नहीं करती। बाजार की उम्मीदों और वास्तविक प्रदर्शन के बीच अंतर भी महत्वपूर्ण होता है।

इस बार निवेशकों को तीन सवालों के जवाब तलाशने होंगे।

पहला, क्या रिफाइनिंग कारोबार में सुधार से कंपनी की कमाई बढ़ेगी?

दूसरा, क्या जियो और रिलायंस रिटेल अपने विकास की रफ्तार बनाए रखेंगे?

तीसरा, क्या कंपनी के नतीजे शेयर में लंबे समय से जारी गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त होंगे?

अंबानी की कंपनी के लिए भरोसा लौटाने का मौका

रिलायंस इंडस्ट्रीज भारतीय बाजार की बड़ी और प्रभावशाली कंपनियों में शामिल है, लेकिन 2026 में शेयर का कमजोर प्रदर्शन बताता है कि बड़ी कंपनी होना ही निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। कंपनी को अपने पारंपरिक कारोबार की मजबूती के साथ डिजिटल और खुदरा कारोबार की विकास क्षमता भी साबित करनी होगी। 1,130 रुपये का स्तर शेयर के लिए महत्वपूर्ण सहारा है, जबकि 1,230 से 1,234 रुपये के ऊपर टिकना संभावित वापसी का संकेत बन सकता है। दूसरी तरफ 1,040 रुपये तक गिरावट की आशंका भी तकनीकी विश्लेषकों ने जताई है। फिलहाल रिलायंस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ मुनाफा बढ़ाने की नहीं, बल्कि शेयर बाजार में निवेशकों का खोया हुआ भरोसा वापस हासिल करने की है। 30 अक्टूबर के तिमाही नतीजे इस दिशा में कंपनी के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकते हैं।

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