₹325 करोड़ की कथित कमाई ने बदले बॉलीवुड के नियम, शाहरुख-रजनीकांत के क्लब में पहुंचे रणवीर
बॉलीवुड में सितारों की फीस हमेशा चर्चा का विषय रही है। कोई अभिनेता एक फिल्म के लिए 50 करोड़ लेता है, कोई 100 करोड़, तो कोई प्रॉफिट शेयरिंग के जरिए अपनी कमाई को कई गुना बढ़ा देता है। लेकिन इन दिनों जिस कहानी ने पूरे फिल्म उद्योग का ध्यान अपनी ओर खींचा है, वह है रणवीर सिंह और उनकी फिल्म फ्रेंचाइज़ी ‘धुरंधर’ की।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणवीर सिंह ने ‘धुरंधर’ डुओलॉजी से करीब 325 करोड़ रुपये की कमाई की है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने इस फिल्म के लिए पारंपरिक तरीके से मोटी फीस लेने के बजाय प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल पर भरोसा किया। यही फैसला आज उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे सफल बिजनेस माइंडेड सितारों की सूची में शामिल कर रहा है।
जब रणवीर ने चुना अलग रास्ता
फिल्म इंडस्ट्री में आमतौर पर अभिनेता पहले अपनी फीस तय करते हैं और फिल्म के प्रदर्शन से उनका सीधा संबंध नहीं होता। फिल्म चले या फ्लॉप हो जाए, उनकी फीस सुरक्षित रहती है। लेकिन रणवीर सिंह ने ‘धुरंधर’ के लिए यह रास्ता नहीं चुना। उन्होंने मेकर्स के साथ ऐसी डील की जिसमें उनकी कमाई सीधे फिल्म की सफलता से जुड़ी हुई थी। यानी फिल्म जितना अधिक कारोबार करेगी, रणवीर का हिस्सा उतना ही बढ़ता जाएगा। यह एक बड़ा जोखिम था, क्योंकि अगर फिल्म उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करती तो उनकी कमाई भी सीमित रह जाती।
क्या होता है प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल?
प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल फिल्म इंडस्ट्री का सबसे जोखिम भरा लेकिन सबसे ज्यादा फायदा देने वाला फॉर्मूला माना जाता है।
इस व्यवस्था में अभिनेता या निर्देशक अपनी अग्रिम फीस कम कर देते हैं या कई बार पूरी तरह छोड़ देते हैं। बदले में उन्हें फिल्म के कुल मुनाफे में हिस्सा मिलता है।
इसमें शामिल होते हैं—
- थिएटर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
- ओटीटी प्लेटफॉर्म डील
- सैटेलाइट राइट्स
- म्यूजिक राइट्स
- विदेशी वितरण अधिकार
- ब्रांड और प्रमोशनल पार्टनरशिप
यानी फिल्म के हर राजस्व स्रोत से कमाई का हिस्सा कलाकार तक पहुंचता है।
‘धुरंधर’ की सफलता ने बदली तस्वीर
‘धुरंधर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं रही, बल्कि एक सफल फ्रेंचाइज़ी के रूप में उभरी। दर्शकों ने फिल्म को हाथोंहाथ लिया और इसका असर बॉक्स ऑफिस पर साफ दिखाई दिया।
फिल्म की सफलता ने रणवीर सिंह के प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल को ऐतिहासिक बना दिया। जिस फैसले को शुरुआत में जोखिम माना जा रहा था, वही आज उनकी सबसे बड़ी जीत बन गया है।
यही वजह है कि बॉलीवुड के बिजनेस सर्किल में रणवीर सिंह की रणनीति को एक केस स्टडी के रूप में देखा जा रहा है।
सुपरस्टार्स के एलीट क्लब में एंट्री
भारतीय सिनेमा में बहुत कम कलाकार ऐसे हैं जिन्होंने फीस के बजाय मुनाफे में हिस्सेदारी लेकर रिकॉर्ड कमाई की हो।
इस सूची में पहले से ऐसे नाम शामिल रहे हैं जिन्होंने अपनी फिल्मों की सफलता के साथ कमाई के नए रिकॉर्ड बनाए—
- Shah Rukh Khan
- Rajinikanth
- Allu Arjun
अब रणवीर सिंह का नाम भी इसी श्रेणी में लिया जा रहा है। यह उपलब्धि केवल एक सफल फिल्म का परिणाम नहीं, बल्कि एक सफल व्यावसायिक निर्णय का भी नतीजा है।
जोखिम बड़ा था, इनाम उससे भी बड़ा
प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल की सबसे बड़ी चुनौती इसकी अनिश्चितता है।
अगर फिल्म दर्शकों को पसंद नहीं आती तो अभिनेता को पारंपरिक फीस से भी कम कमाई हो सकती है। यही कारण है कि अधिकांश कलाकार अभी भी निश्चित फीस वाले मॉडल को प्राथमिकता देते हैं।
रणवीर सिंह ने यह जोखिम उठाया और सफलता ने उन्हें उसका कई गुना बड़ा इनाम दिया।
यह कहानी बताती है कि कभी-कभी बड़े परिणाम पाने के लिए बड़े फैसले लेने पड़ते हैं।
बदल रहा है बॉलीवुड का गणित
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय फिल्म उद्योग का आर्थिक ढांचा तेजी से बदला है। ओटीटी प्लेटफॉर्म, डिजिटल राइट्स और वैश्विक वितरण ने फिल्मों की कमाई के स्रोत बढ़ा दिए हैं।
ऐसे में कलाकार अब केवल अभिनय शुल्क तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे फिल्मों को एक बिजनेस वेंचर की तरह देख रहे हैं, जहां सफलता में उनकी साझेदारी भी हो।
रणवीर सिंह का उदाहरण इसी बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है।
क्या भविष्य में और सितारे अपनाएंगे यह मॉडल?
फिल्म उद्योग के जानकार मानते हैं कि ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद कई बड़े सितारे प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
इससे निर्माताओं पर शुरुआती वित्तीय दबाव कम होगा और कलाकारों को फिल्म की सफलता से सीधे लाभ मिलेगा।
हालांकि यह मॉडल केवल उन्हीं कलाकारों के लिए कारगर साबित हो सकता है जिनकी स्टार पावर और बॉक्स ऑफिस पर मजबूत पकड़ हो। ‘धुरंधर’ डुओलॉजी से जुड़ी रणवीर सिंह की कथित 325 करोड़ रुपये की कमाई केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह बॉलीवुड के बदलते बिजनेस मॉडल का संकेत भी है। रणवीर ने साबित कर दिया कि आज के दौर में सिर्फ अच्छा अभिनेता होना ही काफी नहीं है, बल्कि सही व्यावसायिक फैसले लेना भी उतना ही जरूरी है। फीस छोड़कर मुनाफे पर दांव लगाने का उनका फैसला सफल रहा और अब पूरे फिल्म उद्योग की नजर इस बात पर है कि क्या आने वाले वर्षों में बॉलीवुड के दूसरे सितारे भी इसी राह पर चलते दिखाई देंगे।





