राहुल गांधी की ‘वोट अधिकार यात्रा’: बिहार में चुनाव से पहले SIR के खिलाफ आर-पार की लड़ाई…1 सितंबर को पटना में समापन रैली
कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी आज 17 अगस्त से बिहार के सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत करेंगे। यात्रा में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और INDIA ब्लॉक के कई नेता भी शामिल होंगे। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा – यह ‘एक व्यक्ति-एक वोट’ की लड़ाई है। खेड़ा ने भाजपा पर आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा कर वोट काटे और जोड़े जा रहे हैं।
राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’
बिहार के सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’
पटना। कांग्रेस नेता राहुल गांधी 17 अगस्त से बिहार में 16 दिनों की ‘वोट अधिकार यात्रा’ शुरू कर रहे हैं। यह यात्रा राज्य में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन मानी जा रही है। राहुल गांधी इस यात्रा के माध्यम से बिहार की 24 जिलों की जनता से सीधा संवाद करेंगे और मताधिकार के मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने की कोशिश करेंगे।
क्यों खास है यह यात्रा?
कांग्रेस का दावा है कि SIR प्रक्रिया के नाम पर 65 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। पार्टी का आरोप है कि यह कदम विपक्षी वोट बैंक को कमजोर करने की साजिश है। राहुल गांधी ने इसे “वोट चोरी” करार देते हुए बिहार से एक बड़ा राजनीतिक आंदोलन छेड़ने की तैयारी कर ली है। यह यात्रा सिर्फ चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर हमला नहीं है, बल्कि इसे सीधे 2025 बिहार विधानसभा चुनावों की जमीन तैयार करने वाली कवायद भी माना जा रहा है।
यात्रा का कार्यक्रम और जिलों की सूची
राहुल गांधी की यात्रा 17 अगस्त से शुरू होकर 1 सितंबर तक चलेगी।
17 अगस्त: सासाराम (रोहतास)
18 अगस्त: औरंगाबाद
19 अगस्त: गया और नवादा
21 अगस्त: लखीसराय, शेखपुरा
22 अगस्त: मुंगेर, भागलपुर
23 अगस्त: कटिहार
24 अगस्त: पूर्णिया, अररिया
26 अगस्त: सुपौल
27 अगस्त: दरभंगा, मुजफ्फरपुर
28 अगस्त: सीतामढ़ी, मोतिहारी
29 अगस्त: बेतिया, गोपालगंज, सिवान
30 अगस्त: छपरा, आरा
1 सितंबर: पटना (गांधी मैदान में विशाल रैली और यात्रा का समापन)
तेजस्वी यादव भी आ सकते हैं साथ
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने बताया कि इस यात्रा की शुरुआत सासाराम से होगी, जहां राहुल गांधी के साथ बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और वामपंथी दलों के नेता भी शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह INDIA गठबंधन की एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन होगा, जो सीधे तौर पर केंद्र की मोदी सरकार को चुनौती देगा।
विपक्ष की ताकत का प्रदर्शन
यह यात्रा केवल विरोध का स्वर नहीं होगी, बल्कि विपक्षी गठबंधन INDIA के लिए भी एकता दिखाने का मंच बनेगी। पटना की रैली में कांग्रेस, राजद और वामपंथी दलों के नेता एक साथ मंच साझा कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली बिहार में विपक्ष के चुनावी अभियान का ट्रेलर साबित हो सकती है।
राहुल गांधी का सीधा हमला
राहुल गांधी लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि मोदी सरकार और चुनाव आयोग लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर रहे हैं। बिहार की यह यात्रा उनके उसी नैरेटिव का हिस्सा है, जिसमें वह गरीबों, किसानों और युवाओं के मताधिकार की रक्षा को लेकर आक्रामक रुख दिखा रहे हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि “चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रह गया है” और SIR जैसे कदम लोकतंत्र के साथ अन्याय हैं।
रैली का चुनावी कनेक्शन
बिहार में साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। उससे पहले राहुल गांधी की यह यात्रा न केवल मतदाता सूची विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाएगी, बल्कि कांग्रेस और राजद के लिए जनता के बीच सीधा जुड़ाव का अवसर भी होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर राहुल गांधी की इस यात्रा में जनता का बड़ा समर्थन मिला और पटना की रैली सफल रही, तो यह आने वाले विधानसभा चुनावों में विपक्षी गठबंधन की रणनीति का अहम हिस्सा बन सकती है।
राहुल गांधी की यह ‘वोट अधिकार यात्रा’ सिर्फ कांग्रेस या राहुल गांधी का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे INDIA गठबंधन की एकजुटता की परीक्षा भी माना जा रहा है। तेजस्वी यादव की संभावित मौजूदगी और विपक्षी नेताओं की भागीदारी इसे और बड़ा बना देगी। 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में होने वाली रैली इस बात का संकेत देगी कि क्या बिहार की राजनीति में विपक्ष एकजुट होकर मताधिकार और लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर भाजपा को कड़ी चुनौती देने में सफल हो पाएगा या नहीं। (प्रकाश कुमार पांडेय)





