“हथकड़ी में पहुंचा NEET देने, सीतामढ़ी में कैदी की परीक्षा ने सबको चौंकाया”

Jail arrives to take NEET exam

सीतामढ़ी में रविवार को आयोजित NEET परीक्षा के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद लोगों को कुछ पल के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया। परीक्षा केंद्र के बाहर हजारों छात्र अपने भविष्य के सपनों के साथ पहुंचे थे, लेकिन उन्हीं के बीच एक ऐसा अभ्यर्थी भी था जिसके हाथों में किताबें कम और हथकड़ियां ज्यादा नजर आ रही थीं। पुलिस सुरक्षा के बीच जब एक युवक परीक्षा केंद्र पहुंचा तो लोगों की निगाहें उसी पर टिक गईं। यह कोई सामान्य परीक्षार्थी नहीं था, बल्कि सीतामढ़ी मंडल कारा में बंद कैदी अफजद अंसारी था, जिसे न्यायालय की अनुमति के बाद NEET परीक्षा में शामिल होने के लिए जेल से परीक्षा केंद्र लाया गया था।

हथकड़ी में कैद शरीर

सपनों को नहीं लगी बेड़ी

सीतामढ़ी जेल से NEET देने पहुंचा कैदी

परीक्षा केंद्र पर दिखी उम्मीद और हौसले की अनोखी तस्वीर

सलाखों के पीछे, लेकिन सपने जिंदा

  • जेल की सलाखों से परीक्षा केंद्र तक
  • हथकड़ी में भी जिंदा रहा डॉक्टर बनने का सपना
  • कोर्ट की अनुमति से NEET में शामिल हुआ कैदी
  • परीक्षा केंद्र पर अनोखा नजारा
  • कानून की गिरफ्त, लेकिन उम्मीद बरकरार
  • सुरक्षा घेरे में पहुंचा अभ्यर्थी
  • चर्चा का विषय बना अफजद अंसारी

कंहौली थाना क्षेत्र के बगहा निवासी अफजद अंसारी पिछले करीब 15 दिनों से मारपीट के एक मामले में जेल में बंद है। गिरफ्तारी से पहले उसने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के लिए आवेदन किया था और उसकी परीक्षा डुमरा स्थित कमला गर्ल्स स्कूल में निर्धारित थी।

मामला न्यायालय तक पहुंचा और अदालत ने शिक्षा के अधिकार तथा परीक्षा के महत्व को देखते हुए उसे परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद प्रशासन ने विशेष सुरक्षा व्यवस्था के तहत उसे परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया।

जब परीक्षा केंद्र पर थम गईं निगाहें

परीक्षा केंद्र पर पहुंचे छात्रों और अभिभावकों के लिए यह दृश्य असामान्य था। हथकड़ी लगाए एक युवक, चारों ओर पुलिसकर्मी और बीच में NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा। कुछ लोग हैरान थे, कुछ उत्सुक और कुछ इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि आखिर एक कैदी भी परीक्षा देने कैसे पहुंच सकता है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश का पालन करते हुए अफजद को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया है।

कानून सजा देता है, शिक्षा अवसर

इस घटना ने एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा किया है कि क्या किसी व्यक्ति की कानूनी परेशानी उसके भविष्य के सभी रास्ते बंद कर देती है? भारतीय न्याय व्यवस्था का जवाब है—नहीं।

अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि मुकदमे का सामना कर रहे एक युवक को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिले। यह संदेश भी सामने आया कि अपराध के आरोप और शिक्षा के अधिकार को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा जाता है।

डीएसपी ने क्या कहा

डीएसपी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि अफजद अंसारी मारपीट के मामले में जेल में बंद है। न्यायालय के निर्देश पर उसे सुरक्षा व्यवस्था के साथ परीक्षा केंद्र लाया गया, जहां सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराकर परीक्षा में शामिल कराया गया।

एक तस्वीर, कई संदेश

सीतामढ़ी की यह घटना सिर्फ एक कैदी के परीक्षा देने की कहानी नहीं है। यह उस संघर्ष की कहानी है जिसमें परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सपने रास्ता तलाश ही लेते हैं। हाथों में हथकड़ी जरूर थी, लेकिन आंखों में डॉक्टर बनने का सपना भी था। अदालत का आदेश, पुलिस की निगरानी और परीक्षा केंद्र तक का सफर इस बात का प्रतीक बन गया कि शिक्षा का अधिकार परिस्थितियों से बड़ा हो सकता है। सीतामढ़ी के परीक्षा केंद्र पर रविवार को जो तस्वीर दिखाई दी, वह लंबे समय तक याद रखी जाएगी। एक तरफ कानून का पहरा था, दूसरी तरफ भविष्य की उम्मीद। यह दृश्य बता गया कि सलाखें इंसान को कैद कर सकती हैं, लेकिन उसके सपनों को नहीं।

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