पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी की बड़ी बैठक, आज मुख्यमंत्रियों से करेंगे संवाद

Prime Minister Narendra Modi discusses West Asia conflict with Chief Ministers

Prime Minister Narendra Modi

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए राज्यों की तैयारियों की समीक्षा, ऊर्जा आपूर्ति पर रहेगा फोकस

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi आज शाम सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अहम बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से होगी, जिसमें मौजूदा वैश्विक हालात के बीच भारत की तैयारियों और राज्यों की भूमिका पर चर्चा की जाएगी।

‘टीम इंडिया’ के तहत समन्वय पर जोर

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है। ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत सभी राज्यों को एकजुट होकर संभावित चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर काम करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। हालांकि, आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण जिन राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, वहां के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।

ऊर्जा आपूर्ति पर खास फोकस

पश्चिम एशिया में संघर्ष का सीधा असर वैश्विक तेल और गैस बाजार पर पड़ता है। ऐसे में बैठक में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, उर्वरक और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने दिया जाएगा और इसके लिए सरकार पूरी तरह सतर्क है।

संसद में भी रखा गया था भारत का पक्ष

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर बयान देते हुए भारत की स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ने ऊर्जा आयात के स्रोतों को बढ़ाकर 27 देशों से 41 देशों तक कर दिया है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो गई है। यह रणनीति मौजूदा संकट के समय भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में काम कर रही है।

राज्यों की तैयारी की होगी समीक्षा

बैठक में राज्यों से यह भी पूछा जाएगा कि उन्होंने आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं। साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्यों की तैयारियों का आकलन किया जाएगा।

पश्चिम एशिया संकट के बीच प्रधानमंत्री की यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। इसका उद्देश्य केवल हालात की समीक्षा करना नहीं, बल्कि पूरे देश में एक समन्वित और मजबूत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है, ताकि वैश्विक अस्थिरता का असर भारत पर न्यूनतम पड़े।

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